
New Delhi, 26 जून . नीति आयोग के सदस्य डॉ. आर. बालासुब्रमण्यम ने Friday को वित्तीय समावेशन और वित्तीय स्वास्थ्य (फाइनेंशियल हेल्थ) को लेकर India के एकीकृत दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला. उन्होंने यह बात नीदरलैंड की महारानी मैक्सिमा के साथ हुई बातचीत के दौरान कही. महारानी मैक्सिमा संयुक्त राष्ट्र महासचिव की वित्तीय स्वास्थ्य विषयक विशेष अधिवक्ता (स्पेशल एडवोकेट) भी हैं.
डॉ. बालासुब्रमण्यम ने बताया कि India में वित्तीय समावेशन की यात्रा जैम (जेएएम) ट्रिनिटी जन धन खाते, आधार और मोबाइल कनेक्टिविटी से शुरू हुई. इसी व्यवस्था ने पूरे देश में बड़े स्तर पर वित्तीय समावेशन की मजबूत नींव रखी. उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में इस ढांचे की मदद से एक एकीकृत सामाजिक सुरक्षा प्रणाली विकसित हुई है, जिससे देश की बड़ी आबादी के वित्तीय स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार हुआ है.
ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में अपने लंबे अनुभव का उल्लेख करते हुए डॉ. बालासुब्रमण्यम ने कहा कि वित्तीय स्वास्थ्य को केवल बैंकिंग सेवाओं तक सीमित नहीं देखा जा सकता, बल्कि इसे आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा के व्यापक संदर्भ में समझना चाहिए. उनका कहना था कि केवल वित्तीय सेवाओं तक पहुंच पर्याप्त नहीं है, जब तक उसके साथ मजबूत सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था न हो.
उन्होंने बताया कि वित्तीय समावेशन के साथ-साथ आयुष्मान India और आयुष्मान India हेल्थ अकाउंट (एबीएचए) जैसी स्वास्थ्य सुरक्षा योजनाएं, सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के जरिए खाद्य सुरक्षा, Prime Minister उज्ज्वला योजना के माध्यम से ऊर्जा तक पहुंच, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) और पेंशन योजनाओं के विस्तार ने देश भर के परिवारों की आर्थिक मजबूती बढ़ाई है.
नीति आयोग के सदस्य ने कहा कि इन सभी कल्याणकारी योजनाओं के आपसी समन्वय ने लोगों के वित्तीय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे करोड़ों परिवारों की आर्थिक असुरक्षा कम हुई है और उनकी सामाजिक सुरक्षा मजबूत हुई है.
महारानी मैक्सिमा के साथ हुई इस बातचीत के दौरान India ने यह भी साझा किया कि किस प्रकार वित्तीय समावेशन को स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के साथ जोड़कर लोगों और समुदायों के लिए अधिक मजबूत तथा टिकाऊ आर्थिक आधार तैयार किया जा सकता है.
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डीबीपी
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