
New Delhi, 16 अप्रैल . Supreme Court ने स्पष्ट किया है कि पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान संशोधित मतदाता सूची से बाहर किए गए लोगों को केवल तभी मतदान का अधिकार मिलेगा, जब उनकी अपीलें निर्धारित समयसीमा से पहले अपीलीय न्यायाधिकरण द्वारा स्वीकार कर ली जाएं.
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि केवल अपील लंबित होने के आधार पर किसी व्यक्ति को वोट देने का अधिकार नहीं मिल सकता.
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यदि अपीलीय न्यायाधिकरण किसी अपील को स्वीकार करते हुए मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने का निर्देश देता है, तो ऐसे निर्देशों को मतदान से पहले अनुपूरक संशोधित मतदाता सूची जारी कर लागू किया जाना चाहिए.
संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए शीर्ष अदालत ने भारतीय निर्वाचन आयोग (ईसीआई) को निर्देश दिया कि 21 अप्रैल या 27 अप्रैल (मतदान चरण के अनुसार) तक निपटाई गई अपीलों के आदेशों को लागू करते हुए अनुपूरक मतदाता सूची जारी की जाए.
Supreme Court ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन लोगों की अपीलें अभी भी लंबित हैं, वे केवल इसी आधार पर मतदान का अधिकार नहीं मांग सकते. कोर्ट ने कहा, “यह स्पष्ट है कि अपील लंबित रहने मात्र से मतदान का अधिकार नहीं मिलता.”
यह टिप्पणी उन याचिकाओं की सुनवाई के दौरान की गई, जिनमें मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के बाद अपील लंबित रहने तक अस्थायी रूप से नाम बहाल करने की मांग की गई थी. अदालत ने इस मांग को खारिज करते हुए कहा कि एसआईआर प्रक्रिया के तहत न्यायिक अधिकारियों द्वारा सत्यापन के बाद ऐसे व्यक्तियों को ‘अप्रामाणिक’ पाया गया है, जिससे उनके नाम पहले से शामिल होने का अनुमान समाप्त हो जाता है.
Supreme Court ने अपने आदेश में यह भी दर्ज किया कि अब तक 34 लाख से अधिक अपीलें अपीलीय न्यायाधिकरणों के समक्ष दायर की जा चुकी हैं, जिनमें गलत तरीके से नाम हटाने के साथ-साथ नए नाम जोड़े जाने को भी चुनौती दी गई है.
अदालत ने कहा कि यदि केवल लंबित अपीलों के आधार पर बाहर किए गए लोगों को वोट देने की अनुमति दी जाती है, तो यह एक असामान्य स्थिति पैदा करेगा, जहां आपत्ति करने वाले भी उन लोगों को मतदान से वंचित करने की मांग कर सकते हैं जिनके नाम सूची में बने हुए हैं, जबकि उनके खिलाफ अपील लंबित है.
Supreme Court ने यह भी बताया कि उसके पूर्व निर्देशों के अनुसार गठित सभी 19 अपीलीय न्यायाधिकरण अब पूरी तरह कार्यरत हैं और पूर्व न्यायाधीशों की समिति द्वारा तय मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के तहत काम कर रहे हैं.
गौरतलब है कि अदालत ने पहले ही निर्देश दिया था कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने के फैसलों के खिलाफ अपील सुनने के लिए पूर्व हाई कोर्ट मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीशों वाले अपीलीय न्यायाधिकरण बनाए जाएं. साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया था कि इन फैसलों को कार्यपालिका या प्रशासनिक प्राधिकरणों के समक्ष चुनौती नहीं दी जा सकती. इस मामले में अगली सुनवाई 24 अप्रैल को निर्धारित है.
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डीएससी
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