
कोलकाता, 19 मई . Chief Minister सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल Government ने Tuesday को एक अधिसूचना जारी कर वर्ष 2010 से पहले राज्य की अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण सूची में शामिल 66 समुदायों को नियमित कर दिया.
यह फैसला राज्य Government द्वारा मौजूदा ओबीसी सूची को रद्द किए जाने के कुछ दिनों बाद लिया गया है.
जारी अधिसूचना के अनुसार, वर्ष 2010 से पहले ओबीसी सूची में शामिल 66 श्रेणियों को बरकरार रखा गया है.
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से राज्य की आरक्षण नीति में बड़ा बदलाव आया है, जिससे ओबीसी वर्गों के भीतर प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है.
पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने यह निर्णय 22 मई 2024 को कलकत्ता हाई कोर्ट की खंडपीठ के आदेश के अनुपालन में जारी अधिसूचना के माध्यम से लिया है.
गौरतलब है कि अदालत ने पहले ओबीसी श्रेणी के तहत कैटेगरी-ए के लिए 10 प्रतिशत और कैटेगरी-बी के लिए 7 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान को रद्द कर दिया था.
इसके अलावा, राज्य में ओबीसी के लिए कुल आरक्षण घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया गया है.
Governor द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि ये 66 श्रेणियां अब सरकारी सेवाओं और पदों में 7 प्रतिशत आरक्षण की पात्र होंगी.
इस सूची में कपाली, कुर्मी, नाई (नापित), तांती, धनुक, कसाई, खंडायत, तुरहा, पहाड़िया मुस्लिम, देवांग और हज्जाम (मुस्लिम) समेत कई पारंपरिक और सामाजिक समुदाय शामिल हैं.
अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि अनुसूचित जाति से ईसाई धर्म अपनाने वाले व्यक्ति और उनके वंशजों को भी इस सूची में शामिल किया गया है.
राज्य Government का मानना है कि यह फैसला अदालत के निर्देशों के अनुरूप सामाजिक न्याय और पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा.
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डीएससी
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