थायराइड और हार्मोन असंतुलन में कंचनार गुग्गुलु के फायदे

New Delhi, 21 अप्रैल . सदियों से हमारे देश में जड़ी-बूटियों से रोगों का निदान किया जा रहा है. कुछ जड़ी-बूटियां ऐसी हैं, जो संजीवनी की तरह काम करती हैं और शरीर को रोग मुक्त करने में मदद करती हैं.

कंचनार गुग्गुलु भी आयुर्वेद की सबसे महत्वपूर्ण औषधियों में से एक है, जिसका इस्तेमाल शरीर की सूजन और गांठों को कम करने में होता आया है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि कंचनार गुग्गुलु से थायराइड को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है.

आयुर्वेद में कंचनार गुग्गुलु को मुख्य औषधि का दर्जा दिया गया है. यह शरीर में गांठों, पीसीओएस, गर्भाशय फाइब्रॉएड और ग्रंथियों की सूजन के लिए बहुत लाभकारी माना जाता है. यह शरीर में कफ और मेद धातु को भी संतुलित करने में मदद करती है लेकिन अगर थायराइड में इसे चिकित्सक की सलाह के साथ इस्तेमाल किया जाए तो उसके हैरान कर देने वाले फायदे देखने को मिलेंगे.

आयुर्वेद मानता है कि अगर शरीर में टॉक्सिन जमा हो रहे हैं, तो शरीर में गांठ बनने की संभावना अधिक होती है और हॉर्मोन का असंतुलन भी होता है, जिससे गर्भाशय से जुड़े रोग और थायराइड की परेशानी शरीर में बनना शुरू हो जाती है. ऐसे में कंचनार गुग्गुलु का सेवन किया जाए, तो शरीर से टॉक्सिन आसानी से बाहर निकल जाते हैं और कफ और वात दोष भी संतुलित रहते हैं.

कंचनार में एंटी-इंफ्लेमेटरी और शरीर को डिटॉक्स करने वाले गुण होते हैं, और गुग्गुलु मेटाबॉलिज्म को दुरुस्त बनाए रखने में मदद करता है. इससे शरीर का पूरा पाचन सिस्टम साफ होना शुरू कर देता है. बाजार में आसानी से कंचनार गुग्गुलु पाउडर और गोली के रूप में मिल जाते हैं, लेकिन सही मात्रा और सही बीमारी में सेवन के लिए चिकित्सक की सलाह जरूर लें.

कंचनार गुग्गुलु के साथ जीवनशैली में बदलाव करना भी उतना ही जरूरी है. आहार में जंक फूड और मीठे का सेवन कम करें. रिफाइंड चीनी से बने उत्पाद पीसीओडी और थायराइड दोनों को बुरी तरीके से प्रभावित करते हैं. इसके साथ ही शारीरिक गतिविधियों को बढ़ाएं. रोजाना सैर पर जएं और हल्का फुल्का वॉक करें. इसके साथ ही रात के समय हल्दी वाला दूध लेना न भलें. इससे थायराइड ग्रांथि से जुड़े हॉर्मोन संतुलित रहते हैं. सुबह की शुरुआत धनिए से करें. जितना हो सकते हरे धनिए का सेवन करें. यह थायराइड के हार्मोन को संतुलित करने में मदद करेगा.