
कोलकाता, 2 अगस्त . निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने Sunday को कहा कि India में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लागू करना जरूरी है ताकि भेदभाव, खासकर महिलाओं के खिलाफ भेदभाव को खत्म किया जा सके. लेखिका ने पड़ोसी बांग्लादेश और Pakistan में भी ऐसे कानून की जरूरत पर जोर दिया.
कोलकाता में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में तस्लीमा नसरीन ने मीडिया से कहा, “सभी विकसित देशों में यूसीसी जैसे कानून हैं. बांग्लादेश, Pakistan और India को समान नागरिक संहिता की जरूरत है. सबके लिए बराबर कानून होने चाहिए. महिलाओं को बहुत भेदभाव का सामना करना पड़ता है और यूसी के जरिए उसका काफी हिस्सा दूर किया जा सकता है. यह जरूरी है.”
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब कुछ दिन पहले पश्चिम बंगाल Government ने राज्य के लिए समान नागरिक संहिता के मसौदे की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित की है.
सरकारी अधिसूचना में कहा गया है कि प्रस्तावित कानून की “व्यापकता और विशालता” को देखते हुए यह पैनल बनाया गया है. समिति आगे कोई कदम उठाने से पहले ड्राफ्ट बिल की व्यापक जांच करेगी.
नसरीन ने कहा कि समानता सभ्यता की बुनियाद है, लेकिन आज भी कई महिलाएं भेदभाव झेल रही हैं. “बांग्लादेश में हिंदू महिलाओं को बराबर अधिकार नहीं हैं. वे अपने पिता की संपत्ति में हिस्सा नहीं ले सकतीं. अगर हिंदू महिलाओं को आजादी और बराबर अधिकार देने हैं तो समान नागरिक संहिता जरूरी है.”
करीब 19 साल बाद कोलकाता लौटी तस्लीमा नसरीन का Saturday को रवींद्र सदन में राज्य Government के एक कार्यक्रम में सम्मान किया गया था.
उन्होंने 2007 में कोलकाता छोड़ा था, जब उनकी किताब ‘द्विखंडितो’ के प्रकाशन के विरोध के बाद तत्कालीन वाम मोर्चा Government ने उन्हें शहर से बाहर भेज दिया था.
इस बीच उन्होंने मदरसों की भूमिका की आलोचना भी की और देश में बढ़ते धार्मिक कट्टरवाद पर चिंता जताई. उन्होंने कहा, “बांग्लादेश में मदरसों का अस्तित्व नहीं होना चाहिए. कई मामलों में पाया गया है कि मदरसे जिहादी तैयार कर रहे हैं. इमामों और मदरसा शिक्षकों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है. मुझे नहीं लगता मदरसों की कोई जरूरत है. कई स्नातक आगे जाकर कोई उत्पादक काम नहीं करते, वे दान पर ही जीते हैं.”
इस बयान के साथ तस्लीमा नसरीन ने व्यावहारिक रूप से पूर्व Chief Minister बुद्धदेव भट्टाचार्य की उस टिप्पणी का समर्थन किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि “मदरसों में आतंकी तैयार किए जाते हैं.”
2002 में तत्कालीन Chief Minister बुद्धदेव भट्टाचार्य ने राज्य के सीमावर्ती इलाकों में कुछ गैर-कानूनी मदरसों का जिक्र करते हुए कहा था कि मदरसे आतंकी गतिविधियों के केंद्र बन गए हैं.
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डीएससी
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