
उज्जैन, 28 जून . श्री महाकालेश्वर मंदिर में ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष चतुर्दशी के अवसर पर Sunday को बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती की गई. इस अलौकिक दृश्य के साक्षी बनने के लिए मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे. भक्तों ने देर रात से ही कतारबद्ध होकर बाबा महाकाल के दर्शन किए.
Sunday तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के बाद ढोल-नगाड़ों के साथ बाबा महाकाल के कपाट खोले गए. दिव्य शृंगार और भस्म आरती के बाद जैसे ही श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन हुए, पूरा मंदिर परिसर “जय श्री महाकाल” के उद्घोष से गूंज उठा. मंदिर परिसर घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार से गुंजायमान हो उठा.
महाकाल मंदिर के पट खुलने के साथ ही मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का जलाभिषेक कर दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया. बाबा महाकाल को हरि ओम का जल अर्पित किया गया. बाबा महाकाल का भांग से श्रृंगार किया गया. मस्तक पर चंद्रमा, त्रिशूल और ओम से उनको सजाया गया.
महाकाल मंदिर के पुजारी ने महाआरती संपन्न कराई. बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल की भस्म आरती के दर्शन किए. अपने आराध्य देव के दर्शन पाने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु बीती रात से ही बाबा के दर्शन करने के लिए लाइन में खड़े रहे.
जानकारी के मुताबिक, पहले महाकाल को शमशान की राख अर्पित की जाती थी, लेकिन अब विशेष रूप से कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म का उपयोग होता है. भस्म आरती के दौरान पुरुषों के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है.
बाबा महाकाल की आरती देश-विदेश में मशहूर है, जिसे देखने के लिए जनसामान्य से लेकर बड़ी हस्तियां भी आती हैं. इस दौरान मंदिर के आसपास व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़े पैमाने पर Policeकर्मियों की तैनाती रहती है.
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एसडी/एएस
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