अयोध्या का अंतर्राष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय बनेगा आस्था और तकनीक का संगम, ‘फिजीटल’ तकनीक से होगी राम कथा

अयोध्या, 31 मई . अयोध्या में बन रहा अंतर्राष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय तेजी से आकार ले रहा है. यह संग्रहालय केवल पारंपरिक प्रदर्शनी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आधुनिक तकनीक और डिजिटल माध्यमों के जरिए भगवान राम के जीवन, उनके वंश और राम कथा को बेहद आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करेगा. संग्रहालय के निदेशक डॉ. संजीव कुमार सिंह ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना की जानकारी साझा की.

डॉ. संजीव कुमार सिंह ने बताया कि संग्रहालय में ‘फिजीटल’ तकनीक का उपयोग किया जाएगा. यानी यहां भौतिक और डिजिटल दोनों तरह की तकनीकों का समन्वय होगा. विभिन्न दीर्घाओं (गैलरियों) में आधुनिक इंटरैक्टिव तकनीक के माध्यम से दर्शकों को राम कथा और उससे जुड़े ऐतिहासिक एवं धार्मिक पहलुओं से परिचित कराया जाएगा. इसका उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि आगंतुकों को एक जीवंत और यादगार अनुभव प्रदान करना है.

उन्होंने बताया कि संग्रहालय की एक विशेष दीर्घा का नाम ‘इक्ष्वाकु वंश इतिवृत्त’ रखा गया है. भगवान राम इक्ष्वाकु वंश से संबंधित थे, इसलिए इस गैलरी में उनके वंश का विस्तृत विवरण प्रदर्शित किया जाएगा.

डॉ. संजीव कुमार सिंह के अनुसार, वंश की शुरुआत से लेकर भगवान राम तक की पीढ़ियों को दर्शाने का प्रयास किया जा रहा है. अब तक लगभग 62 पीढ़ियों को शामिल किया गया है, जिनका उल्लेख इतिहास और विभिन्न धर्मग्रंथों में प्रमुखता से मिलता है.

संग्रहालय में केवल भगवान राम के जीवन और वंश का ही नहीं, बल्कि सनातन परंपरा में वर्णित चारों कालों (सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग) में राम कथा की उपस्थिति और प्रभाव को भी दर्शाया जाएगा. डॉ. संजीव कुमार सिंह ने कहा कि राम कथा केवल त्रेतायुग तक सीमित नहीं है, बल्कि चारों युगों में इसकी प्रासंगिकता बनी हुई है. इसी दृष्टिकोण के साथ संग्रहालय में राम कथा, भगवान राम और उनके वंशजों से जुड़ी परंपराओं को चारों कालखंडों के संदर्भ में प्रस्तुत किया जाएगा.

अंतर्राष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय के तैयार होने के बाद यह अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आस्था, इतिहास और आधुनिक तकनीक का अनूठा संगम साबित होगा.

एमएस