
इस्लामाबाद/New Delhi, 6 जून . Pakistan के सेना प्रमुख आसिम मुनीर की नीतियां देश के लिए मुश्किलें पैदा कर रही हैं. घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तरों पर समस्याएं झेलनी पड़ रही है. एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि तमाम कूटनीतिक प्रयासों और दिखावे के बावजूद Pakistan को कोई ठोस सफलता नहीं मिल रही है.
रिपोर्ट के अनुसार, Pakistan इस समय गंभीर आर्थिक और ऊर्जा संकट से जूझ रहा है. देश में महंगाई दर 300 प्रतिशत तक पहुंचने की बात कही गई है, जबकि ऊर्जा क्षेत्र लगभग ठप होने की स्थिति में है. दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान-अमेरिका मध्यस्थता के मुद्दे पर Pakistan की भूमिका बेहद सीमित रही, जिससे शांति वार्ता भी कमजोर स्थिति में पहुंच गई.
‘इंडिया नैरेटिव’ की रिपोर्ट में कहा गया, ” फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने मध्य पूर्व में प्रभाव बढ़ाने और अमेरिका के साथ संबंध सुधारने के लिए कई महीनों तक तथाकथित कूटनीतिक प्रयास किए, लेकिन Pakistan की भूमिका केवल संदेशवाहक तक सीमित रही. इस भूमिका का इस्तेमाल मुख्य रूप से प्रचार के लिए किया गया.”
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि Pakistan की सेना इस समय कई मोर्चों पर दबाव झेल रही है. पश्चिमी सीमा पर बलूचिस्तान की समस्या, कट्टरपंथी तत्वों की सक्रियता और Pakistan समर्थित आतंकी संगठनों की मौजूदगी सेना के लिए चुनौती बनी हुई है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठन कथित तौर पर आसिम मुनीर को धमकियां दे रहे हैं, यदि Pakistan इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने की दिशा में आगे बढ़ता है.
देश के भीतर और बाहर बढ़ते दबाव के कारण आसिम मुनीर की कमजोर स्थिति की ओर ये रिपोर्ट ध्यान दिलाती है . इसमें कहा गया है कि Pakistan की सैन्य और Political व्यवस्था कई मोर्चों पर संकट का सामना कर रही है और मुनीर को अपनी रणनीति बदलनी पड़ सकती है.
रिपोर्ट में पिछले वर्ष हुए पहलगाम आतंकी हमले का भी उल्लेख किया गया है, जिसके लिए Pakistan समर्थित संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट को जिम्मेदार बताया गया. इसके बाद India और Pakistan के बीच 88 घंटे तक चले सैन्य टकराव का जिक्र करते हुए दावा किया गया कि इस संघर्ष में Pakistan की सैन्य प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा.
इसमें आगे कहा गया, “अब मुनीर फिर से घरेलू और वैश्विक, दोनों मोर्चों पर पॉलीक्राइसिस (अलग-अलग मोर्चों पर संकट झेलना) के कगार पर खड़े दिख रहे हैं, जिससे Pakistan की आर्मी में मुनीर की लीडरशिप पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, साथ ही मध्यस्थता का ड्रामा भी कूटनीति के बजाय सैन्य प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा कर खत्म हुआ.”
बढ़ती चुनौतियों के बीच आसिम मुनीर पूर्व सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ की तरह सीमित स्तर के तनाव और प्रचार आधारित रणनीति अपना सकते हैं, ताकि घरेलू समस्याओं से ध्यान हटाया जा सके और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रासंगिकता बनाए रखी जा सके.
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केआर/
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