Supreme Court से आसाराम ट्रस्ट को मिली राहत, गुजरात में जमीन वापस लेने की कार्रवाई पर लगाई रोक

New Delhi, 27 अप्रैल . Supreme Court से आसाराम ट्रस्ट को बड़ी राहत मिली है. Gujarat में आसाराम ट्रस्ट से 45,000 वर्ग मीटर जमीन वापस लेने के मामले में Supreme Court ने राज्य Government की कार्रवाई पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने Gujarat Government को निर्देश दिया कि Ahmedabad स्थित आश्रम की जमीन और संपत्तियों के खिलाफ कोई भी कठोर कार्रवाई न की जाए और यथास्थिति बनाए रखी जाए. अब इस मामले की अगली सुनवाई 5 मई को होगी.

आसाराम ट्रस्ट ने राज्य Government के करीब 45,000 वर्ग मीटर जमीन वापस लेने के फैसले को Supreme Court में चुनौती दी है. यह जमीन मोटेरा में Narendra Modi स्टेडियम के पास स्थित है, जहां सरदार पटेल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाने की योजना है. Supreme Court ने कहा कि जब तक अगली सुनवाई नहीं होती, तब तक Gujarat हाईकोर्ट के 17 अप्रैल के फैसले पर रोक रहेगी और जमीन के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी.

जमीन को खाली कराने को लेकर Government की ओर से जारी नोटिस को ट्रस्ट ने Gujarat हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जो खारिज हो गई थी. इसके बाद डिवीजन बेंच ने भी आश्रम की अपील को खारिज कर दिया था. डिवीजन बेंच ने सिंगल जज के कलेक्टर के जमीन वापस लेने के आदेश को बरकरार रखा था.

हाईकोर्ट ने कहा था कि आसाराम ट्रस्ट ने जमीन आवंटन की शर्तों का उल्लंघन किया और साबरमती नदी क्षेत्र की जमीन पर भी अवैध कब्जा किया गया. नदी की जमीन का नियमितीकरण किसी भी हालत में नहीं किया जा सकता. आश्रम ने हाईकोर्ट से Supreme Court जाने के लिए चार हफ्ते के स्टे की मांग की थी. हालांकि, हाईकोर्ट ने शर्त रखी थी कि अगर आश्रम जमीन खाली करने का हलफनामा देगा, तभी उसे राहत दी जाएगी. आश्रम की ओर से ऐसा न करने पर राहत नहीं दी गई थी.

Supreme Court में इस मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि नगर निगम द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस में जरूरी विवरण की कमी है. पूरा मामला नोटिस पर आधारित है, लेकिन पर्याप्त आधार नजर नहीं आ रहा है. कोर्ट ने राज्य Government से पूछा कि जब पहले कुछ जमीन को नियमित किया गया था, तो अब अचानक उसे अवैध बताकर वापस लेने की जरूरत क्यों पड़ी?

वहीं, Gujarat Government की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि वर्ष 1980 में आश्रम को 6,261 वर्ग मीटर जमीन आवंटित की गई थी. इसके बाद अतिरिक्त जमीन पर कब्जा किया गया और आवंटन शर्तों का उल्लंघन किया, जबकि आश्रम की ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कार्रवाई को गैरकानूनी और दुर्भावनापूर्ण बताया और कहा कि आसाराम ट्रस्ट के पास 1980 के दशक से वैध दस्तावेज हैं. समान परिस्थितियों में अन्य संस्थाओं को राहत दी गई, लेकिन अब निशाना बनाया जा रहा है.

दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद Supreme Court ने फिलहाल Gujarat हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाते हुए राज्य Government को यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं. मामले की अगली सुनवाई 5 मई को तय की है.

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