
New Delhi, 21 जुलाई . नीट पेपर लीक मामले और सीजेपी के विरोध-प्रदर्शनों को लेकर Political विवाद तेज हो गया है. एआईएमआईएम प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने Government से पूछे कि दोषियों को सजा देना जरूरी है लेकिन उन छात्रों के नुकसान की भरपाई कैसे होगी, जिनका भविष्य इस पूरे विवाद से प्रभावित हुआ है.
एआईएमआईएम प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, “उन छात्रों का क्या जिनकी मौत हो गई? उन छात्रों का क्या जिन्हें दोबारा परीक्षा देनी पड़ी लेकिन वे वैसी रैंक हासिल नहीं कर पाए? उनका समय तो बर्बाद हो ही चुका है. आप उनके लिए क्या करेंगे?” उन्होंने कहा कि केवल दोषियों पर कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है बल्कि प्रभावित छात्रों के हितों की भी चिंता करनी होगी.
इसी बीच सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन के दौरान हुई Police कार्रवाई को लेकर भी विपक्षी दलों ने Government पर हमला बोला. ओवैसी ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों से बातचीत के बजाय Government ने सख्त रवैया अपनाया.
उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी कई दिनों से अपनी मांगों को लेकर बैठे थे और Government को उनसे संवाद करना चाहिए था. उन्होंने Police कार्रवाई को “कुप्रबंधन” बताते हुए कहा कि घटनास्थल के दृश्य देखकर कोई भी समझ सकता है कि प्रदर्शनकारियों के साथ किस तरह का व्यवहार किया गया.
ओवैसी ने बताया कि उन्होंने संसद परिसर में प्रदर्शन पर बैठे सांसद चंद्रशेखर से मुलाकात की है. लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध की आवाज को सुना जाना चाहिए.
वहीं, झामुमो सांसद महुआ माजी ने कहा कि सभी विपक्षी दल चाहते हैं कि संसद सुचारू रूप से चले,क्योंकि सांसदों के पास अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़े मुद्दे हैं और राष्ट्रीय महत्व के कई विषयों पर भी चर्चा जरूरी है. सर्वदलीय बैठक में भी विपक्ष ने स्पष्ट किया था कि वह उन मुद्दों पर बहस चाहता है जिन पर देश जवाब मांग रहा है.
कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने नीट विवाद को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई. उन्होंने कहा कि शिक्षा और परीक्षा प्रणाली पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए. दिल्ली Police की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि युवाओं की आवाज दबाने की कोशिश की गई है. सिविल ड्रेस में मौजूद लोगों द्वारा लाठीचार्ज किया जाना गंभीर मामला है और संसद में इस मुद्दे को उठाना जरूरी है.
शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत ने प्रदर्शन के दौरान हुई कार्रवाई को लेकर Government पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने Political जीवन में ऐसी स्थिति पहले कभी नहीं देखी. सावंत ने आरोप लगाया कि Government प्रदर्शनकारियों से बातचीत नहीं करना चाहती.
उन्होंने कहा कि अगर Government शुरुआत में ही प्रदर्शनकारियों से बात करती और मामले की जांच का भरोसा देती तो विवाद जल्द खत्म हो सकता था. लंबे समय से शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोग अचानक हिंसा क्यों करेंगे. उन्होंने आशंका जताई कि प्रदर्शन को बदनाम करने के लिए कुछ लोगों की घुसपैठ हो सकती है.
कांग्रेस सांसद चमाला किरण कुमार रेड्डी ने Government पर विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि Government को यह समझना चाहिए कि उसे करीब 30 प्रतिशत वोट मिले हैं और वह भारी बहुमत के आधार पर विपक्ष को नजरअंदाज नहीं कर सकती.
उन्होंने कहा कि विपक्ष को संसद में अपने मुद्दे रखने का अधिकार है लेकिन स्थगन प्रस्तावों को मंजूरी नहीं दी जा रही है. नीट विवाद और जंतर-मंतर पर चल रहे विभिन्न आंदोलनों का जिक्र करते हुए कहा कि Government को प्रदर्शनकारियों से पहले ही बातचीत करनी चाहिए थी.
Samajwadi Party के सांसद राजीव राय ने भी प्रदर्शन के दौरान Police कार्रवाई की आलोचना की. उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों के साथ लोकतांत्रिक तरीके से व्यवहार नहीं किया गया. महिलाओं के साथ कथित दुर्व्यवहार, बिना वर्दी वाले लोगों द्वारा लाठी चलाने और Policeकर्मियों की पहचान नहीं होने जैसे मामले गंभीर हैं.
राजीव राय ने आरोप लगाया कि सांसद होने की जानकारी देने के बाद भी उनके साथ मारपीट की गई. उन्होंने Police व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि मौके पर मौजूद एंबुलेंस केवल दिखावे के लिए थी और उसमें आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं.
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पीएम
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