
New Delhi, 30 मई . Pakistan खुद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत खिलाड़ी के तौर पर दिखाता रहा है. हालांकि, हकीकत वह न सिर्फ अपने देश में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी छवि बदलने की पूरी कोशिश कर रहा है.
Pakistan में समस्याएं गंभीर हैं, मानवाधिकार के मुद्दे एक बड़ी चिंता बने हुए हैं और दुनिया बार-बार इस पर ध्यान दे रही है. इस्लामाबाद अपनी सकारात्मक छवि बनाने के लिए दुनिया भर के लॉबिस्ट से बात कर रहा है ताकि वह असरदार लोगों से मिल सके.
हालांकि, Pakistan Government President डोनाल्ड ट्रंप की Government में अमेरिका के साथ अपने नए संबंध के बारे में खूब बातें कर रही है, लेकिन असलियत बिल्कुल अलग है.
Pakistan के लोगों के साथ हो रहे बर्ताव पर सवाल उठ रहे हैं. अधिकारियों का कहना है कि Pakistan ऐसे लॉबिस्ट में भारी निवेश कर रहा है जो देश की अच्छी छवि दिखा सकें. अधिकारियों का कहना है कि Pakistan के लिए किसी देश के शीर्ष नेतृत्व के साथ सिर्फ अच्छे संबंध रखना काफी नहीं है, बल्कि दूसरे फैसले लेने वालों का भरोसा भी उतना ही अहम है और इसलिए छवि का सुधार बहुत जरूरी है.
एक और अधिकारी ने कहा कि Pakistan को लगा कि वह दबाव समूह और लॉबिस्ट की मदद के बिना अपनी छवि सुधारने का काम कर सकता है. हालांकि, उल्लंघन गंभीर हो गए हैं, खासकर खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान क्षेत्र में.
यहां जो उल्लंघन हो रहे हैं, वे अब दबी-छुपी बातें नहीं हैं. इस इलाके के लोग बहुत ज्यादा बोलने लगे हैं और social media की वजह से, समस्या सबके सामने आ रही हैं. एक और अधिकारी ने कहा कि हर बड़े इवेंट या ग्रुपिंग में ये मुद्दे उठाए जाते हैं और Pakistan के पास कोई जवाब नहीं होता.
इस महीने की शुरुआत में Pakistan ने अमेरिका की एक फर्म, एर्विन ग्रेव्स स्ट्रैटेजी ग्रुप, एलएलसी के साथ डील साइन किया. इस फर्म को हर महीने 50,000 डॉलर दिए जाएंगे और इसे Pakistan के बारे में वाशिंगटन की सोच को बदलने का काम सौंपा गया है. यह फर्म वाशिंगटन में पावर सर्कल का हिस्सा रहे लोगों के साथ उच्च स्तर की मीटिंग आयोजित करेगी.
अधिकारियों का कहना है कि Pakistan ने पहले भी ऐसा किया है. उन्होंने मीटिंग, कॉन्फ्रेंस और राउंड टेबल इवेंट के लिए लोगों को रखा है. ये सभी इवेंट इस्लामाबाद की छवि को बदलने पर केंद्रित हैं. अधिकारी ने आगे कहा कि इसका मकसद Pakistan की एक सकारात्मक छवि बनाना और उन गंभीर उल्लंघनों को छिपाना है जो Pakistan अपने देश में करता है.
ये फर्में अफगानिस्तान के मुद्दे पर भी फोकस कर रही हैं. अफगान तालिबान के Government के अपनी बात मानने से इनकार करने के बाद Pakistan और उसके बीच अनबन चल रही है.
Pakistan बिना किसी सबूत के दावा कर रहा है कि अफगानिस्तान अपनी धरती को आतंकी समूहों के लिए लॉन्चपैड के तौर पर इस्तेमाल होने दे रहा है. उसने अफगानिस्तान पर तहरीक-ए-तालिबान Pakistan (टीटीपी) का समर्थन करने का आरोप लगाया है. हालांकि, अफगान तालिबान लगातार Pakistan Government के इस दावे से इनकार करता रहा है.
इन प्रेशर ग्रुप्स का काम अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह समझाना होगा कि अफगानिस्तान कैसे हमलावर बन गया है, जिसकी वजह से Pakistanी जमीन पर कई आतंकी हमले हुए हैं. ये समूह अमेरिका में शीर्ष नेताओं और डिसीजन-मेकर्स को यह समझाने की कोशिश करेंगे कि अफगानिस्तान पर लगाम क्यों लगानी चाहिए और क्षेत्रीय स्थिरता की जरूरत क्यों है.
Pakistan पर नजर रखने वालों का कहना है कि यह Pakistan का एक हताशा भरा कदम है, क्योंकि ऐसा कोई दिन नहीं जाता जब देश में बड़े मानवाधिकार उल्लंघन की खबरें न आती हों.
हाल ही में, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कमेटी की एक डिटेल्ड रिपोर्ट में हिंदू और ईसाई अल्पसंख्यकों में धार्मिक असहिष्णुता, जबरदस्ती किडनैपिंग और धर्मांतरण के फैलने पर गंभीर चिंता जताई गई.
यूएन कमेटी ने शिया मुसलमानों, ईसाइयों, अहमदियों, हिंदुओं और सिखों पर बढ़ते हमलों और धमकियों से निपटने में Pakistan की नाकामी पर भी सवाल उठाए.
अधिकारियों का कहना है कि Pakistan अब पूरी तरह से फील्ड मार्शल असीम मुनीर के कंट्रोल में है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उन्हें मुंह की खानी पड़ी थी.
मामले को और भी बदतर बनाने के लिए, टीटीपी और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने Pakistanी सुरक्षा बलों पर कहर बरपाया है. केपी और बलूचिस्तान के लोग विकास की कमी और गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन के बारे में खुले तौर पर Government की बुराई कर रहे हैं.
असल में, इन लोगों ने Pakistan के झांसे का पर्दाफाश किया है. अधिकारी ने कहा कि मुनीर को एहसास है कि Pakistan और अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों में उनकी छवि खराब हुई है.
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में, कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया आउटलेट्स में Pakistan के समर्थन में आर्टिकल्स की उम्मीद की जा सकती है. ये दबाव समूह मीडिया की बातों को Pakistan के पक्ष में बदलने की भी कोशिश करेंगे. विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि मीडिया प्रमुखों और उनके बोर्ड मेंबर्स के साथ बातचीत के बाद ऐसा किया जाएगा.
एक अधिकारी ने कहा कि ऐसे अभियान पर भारी खर्च करने का फैसला Pakistan के दोहरे रवैये को भी दिखाता है. वह गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है, लेकिन उसके पास ऐसे छवि सुधारने वाले कैंपेन पर खर्च करने के लिए फंड है. अधिकारी ने आगे कहा कि सच तो यह है कि इस्लामाबाद और मुनीर हताश हैं और वे अपनी इज्जत बचाने के लिए अपने ही लोगों की शिकायतों को नजरअंदाज कर देंगे.
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पीएम
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