
New Delhi, 24 मई . President द्रौपदी मुर्मु Monday को President भवन में आयोजित नागरिक अलंकरण समारोह में वर्ष 2026 के पद्म पुरस्कार प्रदान करेंगी. इस बार पद्म श्री से सम्मानित होने वालों में अरुणाचल प्रदेश की सामाजिक कार्यकर्ता तेची गुबिन और Gujarat के Gujaratी साहित्यकार रतिलाल बोरिसागर का नाम शामिल है.
तेची गुबिन पिछले 26 वर्षों से कल्याण आश्रम के साथ निरंतर सामाजिक सेवा में लगे हुए हैं. उन्होंने से विशेष बातचीत में कहा, “मुझे नहीं पता कि इस बारे में क्या कहूं. मैंने तो कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मुझे ऐसा कोई पुरस्कार मिलेगा. जब मुझसे पूछा गया कि क्या मैंने इसके लिए आवेदन किया था, तो मैंने कहा, नहीं, मैंने आवेदन नहीं किया था. मुझे नहीं पता कि मेरा चयन कैसे हुआ या किसकी सिफारिश पर हुआ.”
तेची गुबिन ने पुरस्कार का पूरा श्रेय कल्याण आश्रम को देते हुए कहा, “इसका असली श्रेय उस संस्था को जाता है, जहां मैं पिछले 26 सालों से बिना किसी रुकावट के लगातार काम कर रहा हूं.” उन्होंने बताया कि 25 जनवरी को गृह मंत्रालय से फोन आया तो वे सुखद आश्चर्य में आ गए. तेची गुबिन ने कहा, “मुझे इस महीने की 25 तारीख को पुरस्कार ग्रहण करने के लिए दिल्ली आमंत्रित किया गया है.”
Ahmedabad के रतिलाल बोरिसागर पेशे से शिक्षक रहे हैं. उन्होंने Gujarat शिक्षा बोर्ड में सेवा की और Gujaratी साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया है. कई पुस्तकें लिखने वाले बोरिसागर को पद्मश्री से सम्मानित किया जा रहा है.
रतिलाल बोरिसागर ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा, “मुझे ठीक से याद नहीं है कि पहले पुरस्कार कैसे दिए जाते थे, लेकिन हाल के वर्षों में मैंने देखा है कि कम-ज्ञात व्यक्तियों को भी पहचान मिल रही है. जो लोग राष्ट्रीय स्तर पर बहुत प्रसिद्ध नहीं हैं, लेकिन अपने क्षेत्र में बेहतरीन काम कर रहे हैं, उन्हें सम्मानित किया जा रहा है.”
उन्होंने India Government की सराहना करते हुए कहा, “जब पद्म पुरस्कारों की घोषणा होती है, तो हम देखते हैं कि कई प्राप्तकर्ता बहुत प्रसिद्ध नहीं होते, लेकिन उनकी सेवा को ध्यान में रखा जाता है. इस दृष्टिकोण के लिए मैं India Government को बधाई देता हूं और आभारी भी हूं.”
पद्म श्री देश का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो कला, साहित्य, शिक्षा, चिकित्सा, सामाजिक कार्य और अन्य क्षेत्रों में असाधारण योगदान के लिए दिया जाता है. इस बार के चयन में ग्रामीण और कम चर्चित क्षेत्रों के कार्यकर्ताओं और साहित्यकारों को जगह मिलना उल्लेखनीय है.
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एससीएच/एबीएम
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