
माउंट आबू, 6 जुलाई . विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने विभिन्न विभागों के लिए एक आधुनिक, प्रौद्योगिकी-आधारित और नागरिक-केंद्रित कानूनी व्यवस्था के निर्माण के लिए एक दूरदर्शी सुधार एजेंडा तैयार करने के लिए विचार-विमर्श का नेतृत्व किया.
उन्होंने Rajasthan के माउंट आबू स्थित ज्ञान सरोवर में 4 जुलाई को दो दिवसीय ‘सुधार उत्सव एवं चिंतन शिविर 2026’ का उद्घाटन किया. मेघवाल ने मंत्रालय के लिए सुधार प्रस्तावों, संस्थागत सुदृढ़ीकरण के लिए सिफारिशों और कार्यान्वयन योग्य उपायों से युक्त एक विजन दस्तावेज तैयार करने का आह्वान किया.
उन्होंने अधिकारियों से मंत्रालय की हालिया उपलब्धियों की समीक्षा करने, प्रमुख कानूनी, विधायी और संस्थागत सुधारों पर विचार-विमर्श करने और India के कानूनी एवं विधायी ढांचे को मजबूत करने के लिए एक दूरदर्शी रोडमैप तैयार करने का आग्रह किया.
मेघवाल ने कहा कि दो दिवसीय कार्यक्रम विधि एवं न्याय मंत्रालय के नवाचार, पारदर्शिता, संस्थागत उत्कृष्टता और सहयोगात्मक नीति निर्माण पर निरंतर ध्यान केंद्रित करने को दर्शाता है, जिसका उद्देश्य विकसित India की परिकल्पना के अनुरूप India के कानूनी एवं विधायी ढांचे को सुदृढ़ करना है.
मेघवाल ने मंत्रालय के संबंधित विभागों के लिए एक दूरदर्शी सुधार एजेंडा तैयार करने में अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी, विचारपूर्वक विचार-विमर्श और सामूहिक प्रयासों की सराहना की.
विधायी विभाग और विधि मामलों के विभाग के सचिव राजीव मणि ने उत्सव एवं शिवियों के परिणाम को ‘संकल्प पत्र’ के रूप में जारी किया, जिसमें दो दिवसीय चिंतन शिविर से उभरे सामूहिक संकल्प और सुधार एजेंडा को समाहित किया गया है.
कार्यक्रम में अलग-अलग सत्रों का आयोजन किया गया और कानूनी शासन, विधायी सुधार, डिजिटल परिवर्तन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता को अपनाना, प्रौद्योगिकी-आधारित शासन, संस्थागत सुदृढ़ीकरण और क्षमता निर्माण पर केंद्रित विचार-मंथन किया गया.
‘संकल्प पत्र’ में कहा गया कि हम, विधायी विभाग और विधि मामलों के विभाग के अधिकारी, केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) राम मेघवाल की उपस्थिति में यह संकल्प लेते हैं कि हम विकसित India के 2047 लक्ष्यों की दिशा में अपने सभी प्रयासों में संविधान, विधि के शासन और सत्यनिष्ठा एवं लोक सेवा के उच्चतम मानकों को बनाए रखेंगे.
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एमएस/
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