भारत बायोफार्मा नवाचार की अगली लहर का नेतृत्व करने को तैयार: अनुप्रिया पटेल

New Delhi, 11 जून . केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने Thursday को कहा कि India तेजी से वैश्विक फार्मास्युटिकल महाशक्ति के रूप में उभर रहा है और बायोफार्मास्युटिकल नवाचार की अगली लहर का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार है.

एसोचैम फार्मा समिट एंड अवॉर्ड्स 2026 को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि Government घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने, नवाचार को बढ़ावा देने और एक मजबूत स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, जिससे फार्मास्युटिकल और जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र में दीर्घकालिक विकास सुनिश्चित हो सके.

उन्होंने कहा, “India तेजी से वैश्विक फार्मास्युटिकल केंद्र के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है और बायोफार्मास्युटिकल नवाचार की अगली पीढ़ी का नेतृत्व करने की तैयारी कर चुका है.”

अनुप्रिया पटेल ने कहा कि फार्मास्युटिकल और बायोटेक्नोलॉजी क्षेत्र में आत्मनिर्भर India का लक्ष्य केवल आर्थिक उद्देश्य नहीं, बल्कि देश की रणनीतिक आवश्यकता भी है.

उन्होंने प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इनके माध्यम से सक्रिय औषधीय अवयवों (एपीआई) और महत्वपूर्ण दवाओं के घरेलू उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे प्रमुख फार्मा कच्चे माल के लिए आयात पर निर्भरता कम हुई है.

Union Minister ने बायोफार्मास्युटिकल क्षेत्र को India की अगली रणनीतिक सीमा बताते हुए कहा कि हाल ही में घोषित 10,000 करोड़ रुपये के ‘बायोफार्मा शक्ति मिशन’ से Government की नवाचार आधारित स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति प्रतिबद्धता स्पष्ट होती है.

उन्होंने बताया कि इस मिशन का लक्ष्य वर्ष 2047 तक कम से कम 100 बायोलॉजिक्स विकसित करना है और India को उन्नत उपचार, नवीन जैविक दवाओं तथा अगली पीढ़ी के स्वास्थ्य समाधान का वैश्विक केंद्र बनाना है. साथ ही, यह मिशन सस्ती जेनेरिक दवाओं के क्षेत्र में India की वैश्विक नेतृत्वकारी भूमिका को भी मजबूत करेगा.

अनुप्रिया पटेल ने कहा, “फार्मा क्षेत्र का भविष्य उन्हीं देशों का होगा जो नवाचार करेंगे, सहयोग बढ़ाएंगे और पूरी दुनिया के लिए समाधान विकसित करेंगे. India इस नेतृत्व के लिए तैयार है.”

उन्होंने Government, उद्योग, शिक्षण संस्थानों, स्टार्टअप्स, निवेशकों, नियामक संस्थाओं और स्वास्थ्य संगठनों के बीच मजबूत सहयोग की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इससे अनुसंधान क्षमता, विनिर्माण, आपूर्ति श्रृंखला और वैश्विक गुणवत्ता मानकों को और मजबूती मिलेगी.

इस अवसर पर रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के फार्मास्युटिकल विभाग के सचिव मनोज जोशी ने कहा कि भारतीय दवा उद्योग नवाचार, गुणवत्ता, नियामकीय उत्कृष्टता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बल पर विकास के नए चरण में प्रवेश कर रहा है.

वहीं, एसोचैम के पूर्व अध्यक्ष अनिल के. अग्रवाल ने कहा कि फार्मास्युटिकल क्षेत्र ऐसे निर्णायक दौर में है, जहां नवाचार, बेहतर नियामकीय व्यवस्था और साझेदारी आधारित सहयोग India को उन्नत स्वास्थ्य समाधानों का वैश्विक नेता बना सकते हैं.

डीएससी