
अमरावती, 10 अगस्त . आंध्र प्रदेश के Chief Minister एन. चंद्रबाबू नायडू ने Monday को घोषणा की कि जमीन के दोबारा सर्वे की प्रक्रिया 2027 तक पूरी कर ली जाएगी और किसानों व जमीन मालिकों को राज्य के आधिकारिक चिह्न वाली पट्टादार पासबुक जारी की जाएंगी.
एलुरु जिले के कैकालुरु विधानसभा क्षेत्र के कालिदिंडी में ‘मी भूमि-मी हक्कू’ पट्टादार पासबुक वितरण कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए उन्होंने कहा कि गठबंधन Government राजस्व से जुड़ी समस्याओं को हल करने के एकमात्र एजेंडे पर काम कर रही है.
नायडू ने बताया कि जमीन के रिकॉर्ड को दुरुस्त और व्यवस्थित करने के लिए ‘राजस्व रिकॉर्ड सुधार 2026’ शुरू किया गया था. उन्होंने एक महिला किसान, नल्लाजर्ला दुर्गा भवानी को राज्य के चिह्न वाली पट्टादार पासबुक जारी की.
बाद में सभा को संबोधित करते हुए Chief Minister ने कहा कि केंद्र और राज्य में ‘डबल-इंजन’ Government तेजी से विकास कर रही है. उन्होंने दूसरे विश्व युद्ध में भाग लेने वाले पूर्व सैनिकों को आवंटित जमीन से जुड़ी समस्या को हल किया, जिसे धारा 22-ए के तहत रखा गया था और उन्हें पट्टे जारी किए.
उन्होंने कहा कि पिछली Government (2019-2024) के दौरान हुए नुकसान से राजस्व रिकॉर्ड खराब हो गए थे. जमीन और संपत्तियों को डिजिटल रूप से धारा 22-ए के तहत डाल दिया गया था, जिससे विवाद पैदा हुए. जब 2024 में गठबंधन Government सत्ता में आई, तो जमीन से जुड़े मुद्दों को लेकर बड़ी संख्या में शिकायतें आने लगीं.
नायडू ने कहा कि राज्य Government पट्टादार पासबुक में करेंसी (नोटों) की तरह ही मजबूत सुरक्षा फीचर्स शामिल कर रही है. प्रॉपर्टी की जानकारी में छेड़छाड़ रोकने के लिए ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है, साथ ही क्यूआर कोड और टेक्नोलॉजी पर आधारित दूसरे सुरक्षा फीचर्स भी जोड़े गए हैं.
अब तक किसानों और जमीन मालिकों को 32.22 लाख पट्टादार पासबुक दी जा चुकी हैं. उन्होंने कहा कि अगले सात महीनों में Government 9,365 गांवों में दोबारा सर्वे का काम पूरा करेगी और 68.64 लाख पट्टादार पासबुक जारी करेगी.
Chief Minister ने कहा कि जमीन से जुड़ी लगभग 41,000 एकड़ जमीन की समस्याओं को अब तक सुलझा लिया गया है, जिससे 1.27 लाख से ज्यादा किसानों, उद्योगों और आम लोगों को फायदा हुआ है. उन्होंने कहा कि 1.36 लाख एकड़ जमीन को फ्रीहोल्ड पाबंदियों से मुक्त कराया गया है.
Government पुराने जमीन के रिकॉर्ड को डिजिटाइज कर रही है, जिसमें 1-बी, अडंगल, डीकेटी, एआरसी, इनाम और सीलिंग रिकॉर्ड शामिल हैं. सभी लिंक डॉक्यूमेंट्स ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाएंगे. अब तक लगभग नौ लाख लोगों को ऑटो-म्यूटेशन की सुविधा दी जा चुकी है. दोबारा सर्वे का काम किसानों की मौजूदगी में किया जा रहा है.
ई-केवाईसी पूरा होने के बाद, पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ग्राम सभाओं के जरिए राज्य के प्रतीक चिह्न वाली पट्टादार पासबुक छापी और बांटी जा रही हैं.
–
एमएस/
Skip to content