हमारे सांसद हमें अनैतिक रूप से छोड़कर गए हैं : आनंद दुबे

Mumbai , 25 जून . शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने कहा कि हमारे 9 में से 6 सांसद अनैतिक रूप से हमें छोड़कर गए हैं. उन्होंने Thursday को समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा कि हमने Lok Sabha स्पीकर को सब कुछ बताया है. हमें उम्मीद है कि वह हमारी सुनेंगे.

आनंद दुबे ने कहा कि आखिर ऐसी क्या दिक्कत हो गई कि सांसद हमें बीच रास्ते में छोड़कर चले गए. आप हमारी टिकट पर चुनाव लड़ते हैं और इसके बाद हमें छोड़कर चले जाते हैं. अगर आपको हमें छोड़कर जाना था तो हमारी टिकट पर चुनाव लड़ते ही नहीं. हमारे साथ रहना था, तो कम से 2029 तक हमारा साथ निभाते. अफसोस आपने ऐसा नहीं किया. मुझे लगता है कि ऐसा कोई नियम आना चाहिए कि आप जिसके टिकट पर चुनाव लड़कर आ रहे हैं, आप उनके साथ ही रहें या तो फिर चुनाव ही मत लड़िए.

शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने वेनेजुएला भूकंप को लेकर भी अपनी बात रखी. उनके मुताबिक, इस भूकंप में हजारों लोगों के मौत होने की आशंका जताई जा रही है. हम मृतकों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं. एक देश होने के नाते दूसरे देश के प्रति सहानुभूति होनी चाहिए. वेनेजुएला से हमारे अच्छे संबंध रहे हैं. उससे हम तेल लेते रहे हैं. हमें लगता है कि आज वहां पर आपदा आई है, तो हमें उनकी मदद करनी चाहिए. अमेरिका वेनेजुएला के करीब है. इसके अलावा, यूरोप के कई अन्य देश भी अमेरिका के करीब है. ऐसी स्थिति में सभी देशों को एकजुट होकर अमेरिका की मदद करनी चाहिए. हमारी Government को भी उनकी मदद करनी चाहिए, यही मानवता है. जब कभी दुनिया के किसी देश पर संकट आया है तो India मदद के लिए आगे आया है. आज वेनेजुएला पर संकट आया है. ऐसी स्थिति में हम उनके लिए अपने दिल में सद्भावना रखते हैं. हम उनके साथ खड़े हैं.

आनंद दुबे ने इमजरेंजी को लेकर भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने इसे काला दिन बताते हुए कहा कि आज ही के दिन 1975 में इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगाई थी. आपाताकाल किन हालातों में लगाई गई थी, यह हम सभी को पता है. अब हमें इस बात पर ध्यान रखना होगा कि Government को इमरजेंसी लगाने की नौबत नहीं आए. लोकतंत्र अजर अमर रहना चाहिए. लोकतंत्र में सभी को अधिकार मिलना चाहिए.

इसके अलावा, उन्होंने भरत तिवारी एनकाउंटर का भी जिक्र किया. उनके मुताबिक, जिस तरह से बिहार में भरत तिवारी का एनकाउंटर किया गया. यह एनकाउंटर नहीं, बल्कि फर्जी एनकाउंटर है. यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है. आने वाले दिनों में पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा होनी चाहिए. हमें लगता है कि इमरजेंसी से हमें बहुत कुछ सीखना चाहिए.

वहीं, उन्होंने नीट पेपर भी अपनी बात रखी. उनके मुताबिक, नीट का पेपर पहले भी हो जाना चाहिए था. एक बार पहले ही नीट का पेपर हो चुका है. जब विपक्ष ने आवाज उठाया कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो, उसके बाद फिर से पेपर हुए. अच्छे से हुए. अगर हम चाहते तो पेपर लीक को रोक सकते थे. हम अपने मासूम बच्चों के आत्महत्या को रोक सकते थे. उन्होंने जो सुसाइड किया, उसे रोका जा सकता था. उनके मन में जो गहरी चोट पहुंची, उसे रोक सकते थे. अब Prime Minister खुशी मना रहे हैं कि यह परीक्षा अच्छे से हो गई तो मैं साफ कर देना चाहता हूं कि यह कोई खुशी का विषय नहीं है. यह आत्मचिंतन का विषय है. आखिर ऐसी क्या स्थिति कि हम परीक्षा भी नहीं करवा पा रहे हैं और अगर करवा दे रहे हैं, तो उसकी खुशी मना रहे हैं. जब तक एनटीए पर कार्रवाई नहीं होगी, Union Minister धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं होगा. तब तक लोगों को यह विश्वास नहीं होगा कि केंद्र Government कुछ करना चाहती है. अंत में यही होगा कि केंद्र Government अपने ही मंत्रियों को बचाना चाहती है.

Mumbai के सिविक अधिकारियों की मॉनसून के दौरान कुप्रबंधन और नाले में हुए हादसे को लेकर असंवेदनशील टिप्पणियों के लिए आलोचना हुई. इस पर शिवसेना (यूबीटी) के नेता आनंद दुबे ने प्रतिक्रिया दी. उनके मुताबिक, Mumbai के महापौर ने जिस प्रकार से यह बताने की कोशिश की है कि वो व्यक्ति जो नाले में गिरा हुआ है, वो नाटक कर रहा है. यह बयान बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है. इससे पहले जब इस तरह के हादसे होते थे, तो आज जो लोग सत्ता में हैं, वही हमें कोसा करते थे कि हमारे शासनकाल में लोगों की मौतें हो रही हैं. यह बयान ठीक नहीं है. आपको नगर निगम की जिम्मेदारी सौंपी गई है कि आप लोगों के हित के लिए काम करें. लेकिन, ऐसा नहीं करके अपनी विफलता को छुपाने की कोशिश कर रहे हैं. यह दुर्भाग्यपूर्ण है.

उन्होंने कहा कि जिस प्रकार नाले की सफाई होनी चाहिए थी, उस प्रकार नहीं हो पाई. इस बार मानसून देर में आया. आपके पास पूरा बंदोबस्त करने का पर्याप्त समय था, लेकिन आपने ऐसा नहीं किया. जिस व्यक्ति को आप नाटक बता रहे हैं. अगर वो व्यक्ति खुद सामने आकर कह दे कि नहीं मैं सच में गिरा था, तब आप क्या कहेंगे. इससे यह साफ जाहिर होता है कि Government अहंकार में है. Government का रवैया तानाशाही से भरा हुआ है.

एसएचके/