
Mumbai , 31 मई . शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने इतिहासकार रामचंद्र गुहा द्वारा राहुल गांधी को लेकर की गई टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए गांधी परिवार के नेतृत्व का बचाव किया. साथ ही उन्होंने पश्चिम बंगाल में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले और Political हिंसा को लेकर भी चिंता जताई.
दरअसल “गांधी परिवार ने पीएम मोदी के सत्ता को और मजबूत करने में कैसे भूमिका निभाई” नाम के शीर्षक वाले लेख में रामचंद्र गुहा ने कहा है कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस प्रभावी विपक्ष की भूमिका निभाने में असफल रही है, जिससे भाजपा को अपनी Political स्थिति मजबूत करने में मदद मिली. उन्होंने राहुल गांधी की Political शैली, निरंतरता और प्रशासनिक अनुभव पर सवाल उठाए हैं.
आनंद दुबे ने कहा कि वह रामचंद्र गुहा का बहुत सम्मान करते हैं, लेकिन उन्हें यह भी समझना चाहिए कि इतिहास समय-समय पर खुद को दोहराता भी है और बदलता भी है. गांधी परिवार का नेतृत्व देश की जनता ने हमेशा स्वीकार किया है. इसका उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी ने देश का नेतृत्व किया, राजीव गांधी Prime Minister बने और संजय गांधी की लोकप्रियता भी पूरे देश ने देखी.
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी कई बार सांसद चुने जा चुके हैं. प्रियंका गांधी भी सांसद चुनी गई हैं और सोनिया गांधी भी कई बार संसद पहुंच चुकी हैं. ऐसे में यह कहना सही नहीं होगा कि गांधी परिवार के नेतृत्व को जनता स्वीकार नहीं करती, हालांकि उन्होंने यह भी माना कि कांग्रेस को अपनी Political ताकत और मजबूत करने की जरूरत है.
राहुल गांधी की तारीफ करते हुए आनंद दुबे ने कहा कि वह एक अच्छे इंसान हैं और उन्होंने India जोड़ो यात्रा के माध्यम से देश में प्रेम और भाईचारे का संदेश दिया. राहुल गांधी अक्सर कहते हैं कि वे नफरत के बाजार में मोहब्बत की दुकान खोलने आए हैं.
आनंद दुबे ने कहा कि यह बात कुछ लोगों को पसंद नहीं आती, लेकिन यह भी सच है कि राहुल गांधी ने भाजपा को 240 सीटों पर रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. विपक्ष के नेता के रूप में उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ी है.
उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अभी Prime Minister नहीं बन पाया है तो इसका मतलब यह नहीं कि उसमें योग्यता की कमी है. हर व्यक्ति का अपना समय होता है और राहुल गांधी भी भविष्य में बड़ी जिम्मेदारी संभाल सकते हैं.
आनंद दुबे ने भाजपा के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी की स्थापना 1980 में हुई थी, लेकिन सत्ता तक पहुंचने में उसे लंबा समय लगा.
वहीं, टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले को लेकर उन्होंने चिंता जताई. शिवसेना (यूबीटी) प्रवक्ता ने कहा कि जब देश में एक सांसद सुरक्षित नहीं है, तो आम जनता की सुरक्षा पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है. पश्चिम बंगाल की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा सुशासन का दावा करती थी, लेकिन सत्ता में आने के कुछ ही समय बाद हिंसा की घटनाएं सामने आने लगी हैं.
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