
सिलीगुड़ी, 21 अगस्त . केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में सीमा सुरक्षा, घुसपैठ और बीएसएफ को जमीन उपलब्ध कराने के मुद्दे पर पूर्ववर्ती राज्य Government पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि केंद्र Government ने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के लिए जमीन उपलब्ध कराने की लगातार अपील की थी लेकिन उनकी मांग पूरी नहीं की गई.
सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के जवानों को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने राज्य में नई Government बनने के बाद बीएसएफ और एसएसबी को जमीन उपलब्ध कराने का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में Government बनने के 45 दिनों के भीतर सुवेंदु अधिकारी ने बीएसएफ और एसएसबी को 1,129 एकड़ जमीन उपलब्ध करा दी. यह तेजी इसलिए नहीं है कि Government भाजपा की है बल्कि इसलिए है क्योंकि सीमा सुरक्षा को लेकर गंभीरता है.
गृह मंत्री ने कहा कि जब तक घुसपैठ पर रोक नहीं लगती, तब तक पश्चिम बंगाल और India दोनों पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो सकते. उन्होंने सीमा पर तैनात सुरक्षा बलों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि देश की सुरक्षा के लिए मजबूत सीमा प्रबंधन जरूरी है.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि वह खुद एक बार तत्कालीन Chief Minister ममता बनर्जी के कार्यालय गए थे और उन्हें समझाया था कि मांगी जा रही जमीन बीएसएफ के लिए है, भाजपा के लिए नहीं. इसके बाद भी तत्कालीन Chief Minister ममता बनर्जी ने जमीन नहीं दी, जिसकी वजह से हम काम नहीं कर पा रहे थे.
सिलीगुड़ी में बीएसएफ के फ्रंटियर हेडक्वार्टर की प्रशासनिक इमारत के लिए अमित शाह द्वारा आधारशिला रखे जाने की तैयारी है. इसके अलावा जलपाईगुड़ी में बीएसएफ की 12वीं और 19वीं बटालियन तथा एक ट्रांजिट कैंप से जुड़ी आवासीय और गैर-आवासीय परियोजनाओं के लिए ई-आधारशिला कार्यक्रम भी प्रस्तावित है. इन कार्यक्रमों को लेकर तैयारियां जारी हैं.
कार्यक्रम में अमित शाह ने हाल में मनाए गए स्वतंत्रता दिवस और ‘वंदे मातरम’ के पूरे गायन का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि 2015 से वह Prime Minister Narendra Modi के लाल किले से ध्वजारोहण कार्यक्रम में लगातार शामिल होते रहे हैं. शाह ने कहा कि इस बार का स्वतंत्रता दिवस उनके लिए अलग रहा, क्योंकि 150 वर्ष पूरे होने और आजादी के 80 वर्ष के अवसर पर लाल किले से ‘वंदे मातरम’ का पूरा गायन देश और दुनिया ने सुना.
उन्होंने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की रचना को स्वतंत्रता आंदोलन के लिए प्रेरणादायक बताया. शाह ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ ने स्वतंत्रता आंदोलन को गति देने के साथ देश के भविष्य को लेकर एक विचार और दृष्टि भी दी. उन्होंने कहा कि आजादी के बाद भी इस गीत को पूरे रूप में स्वीकार नहीं किया गया, जिसका उन्हें लंबे समय से दुख रहा है.
अमित शाह ने महान शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्लाह खान का भी उल्लेख किया. उन्होंने बताया कि जब उनसे पूछा गया कि संसद, Presidentयों और बड़े आयोजनों में शहनाई बजाने के बाद उन्हें सबसे ज्यादा खुशी कब मिलती है, तो उन्होंने काशी विश्वनाथ की मौजूदगी में गंगा किनारे सुबह शहनाई बजाने को सबसे सुखद अनुभव बताया था.
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पीएम
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