
Lucknow, 21 अगस्त . वंदे मातरम के गायन को लेकर देश में चल रही Political बहस के बीच बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने कहा कि इस मुद्दे को लेकर राजनीति करना उचित नहीं है. उन्होंने केंद्र और राज्य Governmentों के साथ सभी Political दलों से बेरोजगार युवाओं, छात्र-छात्राओं और बाढ़ से हो रही जान-माल की क्षति जैसे गंभीर जनहित के मुद्दों पर ध्यान देने की अपील की.
मायावती ने Friday को social media प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि देश में वंदे मातरम गायन को पूरा गाना है या शुरू के दो छंद (पैरा) गाना है या नहीं गाना है, इसको लेकर जो इस समय में देश में राजनीति चल रही है, वह ठीक नहीं है और इस मामले में हमारी पार्टी का यही कहना है कि वंदे मातरम गायन को लेकर अभी हाल ही में संसद में जो कानून पास किया गया है यह कोई पहली बार ऐसा नहीं हो रहा है.
उन्होंने कहा कि क्योंकि केंद्र एवं राज्यों में भी सत्ता परिवर्तन के दौरान सभी पार्टियां अपने Political स्वार्थ के हिसाब से या फिर अपनी कमियों पर से जनता का ध्यान बांटने के लिए यह सब करती रहती हैं अर्थात एक-दूसरे के बने कानूनों को बदलती रहती हैं. जबकि इस समय देश और जनहित के मुद्दों पर खासकर बेरोजगार युवाओं तथा छात्र-छात्राओं ‘जेन-जी’ एवं स्कूली बच्चे-बच्चियों की ‘जेन-अल्फा’ एवं इस समय देश के कुछ भागों में भयंकर आई बाढ़ से हो रही जान-माल की हानि आदि के अनेकों और भी अति-महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्र व सभी राज्य Governmentों को तथा साथ ही सभी Political पार्टियों को भी सही से समुचित ध्यान देना चाहिए, यही वर्तमान में देश व जनहित में समय की सबसे जरूरी मांग भी है.
वंदे मातरम को लेकर भाजपा और कांग्रेस में विवाद 15 अगस्त को शुरू हुआ. भाजपा ने कांग्रेस मुख्यालय के स्वतंत्रता दिवस समारोह का वीडियो शेयर कर आरोप लगाया कि पूरा वंदे मातरम गाए जाने के दौरान सोनिया गांधी ने इसे रोकने की कोशिश की और राहुल गांधी भी असहज दिखे. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पूरा वंदे मातरम गाया गया था. उन्होंने स्पष्ट किया कि सोनिया गांधी का इशारा गीत रोकने के लिए नहीं, बल्कि लंबे समय से खड़े कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए कुर्सी मांगने को लेकर था.
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विकेटी/वीकेयू
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