
New Delhi, 5 जून . भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने Friday को जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.6 प्रतिशत रखा है. हालांकि केंद्रीय बैंक ने चेतावनी दी है कि वैश्विक सप्लाई चेन में लंबे समय तक बनी रहने वाली बाधाएं, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में अस्थिरता और मौसम से जुड़े जोखिम देश की आर्थिक वृद्धि पर दबाव बना सकते हैं.
अपनी बहुप्रतीक्षित मौद्रिक नीति की घोषणा के दौरान आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा, “इस वर्ष वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है.”
तीन दिवसीय एमपीसी बैठक के बाद आरबीआई गवर्नर ने कहा, “पहले हमने 6.9 प्रतिशत का अनुमान लगाया था. अब पहली तिमाही के लिए 6.6 प्रतिशत, दूसरी तिमाही के लिए 6.3 प्रतिशत, तीसरी तिमाही के लिए 6.5 प्रतिशत और चौथी तिमाही के लिए 6.8 प्रतिशत का अनुमान है.”
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि India के विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों के पीएमआई आंकड़े संकेत देते हैं कि दोनों सेक्टर मजबूत बने हुए हैं. कारोबारियों का भरोसा भी सकारात्मक बना हुआ है और मांग में अच्छी स्थिति देखने को मिल रही है.
उन्होंने बताया कि निजी खपत अभी भी मजबूत बनी हुई है, जिसे उपभोक्ताओं के बढ़ते खर्च से समर्थन मिल रहा है. इसके अलावा लागत बढ़ने के बावजूद निजी और सरकारी निवेश में भी अच्छी गति बनी हुई है. अप्रैल 2026 में माल निर्यात में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई, जबकि माल ढुलाई और बीमा लागत अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है.
आरबीआई के अनुसार, सेवाओं का निर्यात भी मजबूत बना हुआ है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को लेकर वैश्विक चिंताओं के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय सेवाओं की मांग बनी हुई है. इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को अतिरिक्त समर्थन मिल रहा है.
गवर्नर ने कहा कि अब तक भारतीय अर्थव्यवस्था ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक चुनौतियों के असर को काफी हद तक झेला है, हालांकि बढ़ती लागत का प्रभाव धीरे-धीरे दिखाई देने लगा है.
इसके साथ ही, आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई दर का अनुमान 5.1 प्रतिशत लगाया है. तिमाही आधार पर पहली तिमाही में महंगाई 4.2 प्रतिशत, दूसरी तिमाही में 5.1 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 5.9 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 5.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है.
केंद्रीय बैंक का मानना है कि फिलहाल महंगाई आरबीआई के लक्ष्य स्तर से नीचे बनी हुई है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय कीमतों का पूरा असर घरेलू बाजारों तक नहीं पहुंचा है. हालांकि तीसरी तिमाही में महंगाई ऊपरी सहनशील सीमा के करीब पहुंच सकती है.
आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कोर इंफ्लेशन का अनुमान 4.7 प्रतिशत लगाया है. हालांकि वैश्विक सप्लाई चेन में रुकावट, कमोडिटी कीमतों में तेजी, मानसून की अनिश्चितता और अल नीनो जैसे कारक महंगाई के लिए ऊपर की ओर जोखिम पैदा कर सकते हैं.
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि सामान्य से कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून और अल नीनो की संभावना भी अर्थव्यवस्था और महंगाई के लिए चिंता का विषय बनी हुई है. हालांकि देश में खाद्यान्न का पर्याप्त भंडार और जलाशयों में संतोषजनक जल स्तर कुछ राहत प्रदान करते हैं.
आरबीआई का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं और बढ़ती लागत के बावजूद India की अर्थव्यवस्था लचीली बनी हुई है. मजबूत घरेलू मांग, निवेश गतिविधियां, निर्यात और सेवा क्षेत्र की स्थिरता देश की विकास यात्रा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. हालांकि केंद्रीय बैंक ने संकेत दिया है कि आने वाले महीनों में महंगाई और वैश्विक परिस्थितियों पर लगातार नजर रखी जाएगी.
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डीबीपी
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