अमेरिका का अतिरिक्त टैक्स प्रावधान, भारत के लिए चुनौती : विदेशी मामलों के एक्सपर्ट महेश सचदेव

New Delhi, 8 अगस्त . अमेरिकी सीनेट ने रूस पर नए प्रतिबंधों से जुड़े एक बिल को पारित कर दिया है. मामला अब हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स यानी प्रतिनिधि सभा में पहुंचा है. वहां से पारित होने के बाद President ट्रंप की मुहर के साथ ही ये कानून का रूप ले लेगा. इस बिल में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर कड़े टैरिफ लगाने का प्रावधान है. क्या India को इससे डरने की जरूरत है और इसका कूटनीतिक संबंधों पर क्या असर पड़ेगा? इसे लेकर ने विदेशी मामलों के विशेषज्ञ महेश सचदेव से बात की.

विशेषज्ञ सचदेव ने कहा, “सीनेट ने लींडसे ग्राहम बिल को मंजूरी दी है, रूसी तेल के पांच बड़े आयातकों पर सौ प्रतिशत तक अतिरिक्त टैक्स लगाने का प्रावधान है. President को संस्तुति के लिए भेजा गया है, वो चाहें तो ऐसा कर सकते हैं. हाउस ऑफ रिप्रेजेंटिटिव में पारित हो जाएगा, फिर ट्रंप की सहमति के बाद कानून बन जाएगा. मुझे लगता है कि इसमें बाधा नहीं होगी. अमेरिका के जनमानस में ये बात घर कर गई है कि रूस यूक्रेन के लिए और ईरान, अमेरिका के साथ युद्ध के लिए जिम्मेदार है.”

उन्होंने आगे कहा कि ऐसा पहले भी हुआ था. पिछले साल रूस से तेल-गैस आयात करने के चक्कर में India पर 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाई गई थी, हालांकि वहां के Supreme Court में केस हार गए थे. लेकिन इस बार एससी की चुनौती के बाद बिल को कांग्रेस में पारित किया जा रहा है, तो अब इसके कानून बनने में कोई बाधा नहीं है.

एक्सपर्ट के अनुसार, इस बिल का जो भी स्वरूप होगा, वो India के प्रति चुनौती पेश करेगा. अमेरिका को India की निर्यात की मुहिम को धक्का लगेगा. अनिश्चिचितता होगी. इस बिल पर कितना टैरिफ लगाएंगे, उसका असर India के समग्र निर्यात पर पड़ेगा. इस पर India के निर्यातकों को अनिश्चय का सामना करना पड़ेगा. यही हाल आयातकों का भी रहेगा. खामियाजा दोनों को भुगतना पड़ेगा. India के निर्यात को धक्का लगेगा. 25 फीसदी टैरिफ के बावजूद भी निर्यात में वृद्धि हुई थी, लेकिन वो कम थी. ये India के लिए एक चुनौती भरा होगा, खासकर तब जब दोनों देशों के बीच व्यापारिक समझौता अंतिम चरण में है.

वहीं, आगामी संभावनाओं को लेकर उन्होंने कहा, “India को रूस से तेल आयात करने पर गंभीरता से सोचना होगा. इस समय तेल के बाजार में गिरावट आई है. संभावना है कि होर्मुज खुलेगा तो तेल का प्रवाह बढ़ेगा और दाम नीचे गिर जाएंगे तो ऐसी हालत में India को रूस से तेल नहीं खरीदना पड़ेगा. India दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है. जिस तरफ भी मुड़ेगा, वहां तेल के दाम बढ़ेंगे. चीन पर कोई शुल्क नहीं लगाया गया क्योंकि अमेरिका को डर है कि ड्रैगन रेयर अर्थ मटीरियल्स की सप्लाई बंद कर सकता है, जिससे उसे नुकसान होगा.”

केआर/एबीएम