चीन की वाई-फाई रणनीति पर अमेरिका सतर्क, यूएस लॉ मेकर्स ने ट्रंप प्रशासन से मांगी विस्तृत योजना

वाशिंगटन, 29 जुलाई . चीन में होने वाले वैश्विक रेडियो सम्मेलन से पहले अमेरिका में चिंता बढ़ गई है. अमेरिकी लॉ मेकर्स के एक द्विदलीय समूह ने ट्रंप प्रशासन से पूछा है कि वह इस अहम सम्मेलन के लिए क्या रणनीति बना रहा है.

लॉ मेकर्स का कहना है कि चीन इस मंच का इस्तेमाल वैश्विक स्पेक्ट्रम नियमों को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश कर सकता है, जिसका सीधा असर वाई-फाई, 6जी और अन्य नई संचार तकनीकों के भविष्य पर पड़ेगा.

कुल 19 अमेरिकी लॉ मेकर्स ने विदेश विभाग, वाणिज्य विभाग और फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन (एफसीसी) को एक संयुक्त पत्र भेजा है. इस पहल का नेतृत्व प्रतिनिधि एप्रिल मैक्लेन डिलेनी और जे. ओबरनोल्टे ने किया. पत्र में 2027 में शंघाई में होने वाले वर्ल्ड रेडियोकम्युनिकेशन कॉन्फ्रेंस की तैयारियों पर विस्तृत जानकारी मांगी गई है.

लॉ मेकर्स का कहना है कि इस सम्मेलन में लिए जाने वाले फैसले 6जी नेटवर्क, सैटेलाइट सिस्टम और एडवांस वाई-फाई तकनीक के अंतरराष्ट्रीय नियम तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. इसलिए अमेरिका को एकजुट रणनीति के साथ सम्मेलन में जाना चाहिए और अपने सहयोगी देशों के साथ मजबूत तालमेल बनाना चाहिए.

एप्रिल मैक्लेन डिलेनी ने कहा, “जब चीन समेत अन्य देश वैश्विक स्पेक्ट्रम नीति को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं, तब अमेरिका को पीछे नहीं, बल्कि नेतृत्व करना चाहिए.” उन्होंने कहा कि संघीय एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और सहयोगी देशों के साथ करीबी साझेदारी अमेरिकी नवाचार, आर्थिक प्रतिस्पर्धा और भविष्य की तकनीकों में नेतृत्व बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है.

यह पत्र आर्थिक मामलों के अवर विदेश मंत्री जैकब हेलबर्ग, नेशनल टेलीकम्युनिकेशंस एंड इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन की प्रमुख एरियल रोथ और एफसीसी चेयरमैन ब्रेंडन कैर को भेजा गया है.

सांसदों ने प्रशासन से पूछा है कि सम्मेलन की तैयारियां वरिष्ठ स्तर पर किस तरह समन्वित की जा रही हैं. साथ ही उन्होंने स्टाफ, संसाधनों और सम्मेलन के लिए अमेरिकी राजदूत की नियुक्ति से जुड़ी जानकारी भी मांगी है.

इस पूरे मामले का सबसे अहम मुद्दा 6 गीगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम बैंड है. लॉ मेकर्स का कहना है कि इस बैंड तक बिना लाइसेंस पहुंच बनाए रखना वाई-फाई की क्षमता बढ़ाने, तकनीकी नवाचार, और अमेरिका की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त के लिए बेहद जरूरी है.

पत्र में कहा गया है कि अमेरिका में करीब 90 प्रतिशत स्मार्टफोन डेटा का इस्तेमाल वाई-फाई के जरिए होता है, हालांकि यह आंकड़ा ऑपरेटर के अनुसार अलग-अलग हो सकता है. बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त अनलाइसेंस्ड स्पेक्ट्रम उपलब्ध रहना जरूरी है.

सांसदों ने आरोप लगाया कि चीन और उसके समर्थक देश ऊपरी 6 गीगाहर्ट्ज बैंड में केवल लाइसेंस आधारित मॉडल को बढ़ावा दे रहे हैं. उनका मानना है कि अगर ऐसा हुआ तो वैश्विक स्तर पर अनलाइसेंस्ड वाई-फाई के विस्तार को झटका लगेगा और कनेक्टिविटी सेक्टर में अमेरिका का प्रभाव भी कमजोर पड़ सकता है.

पत्र में प्रशासन से यह भी पूछा गया है कि समान सोच वाले देशों का गठबंधन बनाने के लिए क्या योजना है. खास तौर पर मेक्सिको और ब्राजील के साथ बातचीत की जानकारी मांगी गई है, क्योंकि सांसदों के अनुसार इन दोनों देशों ने पहले 6 गीगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम के मुद्दे पर कुछ मामलों में चीन का समर्थन किया था.

द इंटरनेट एंड टेलीविजन एसोसिएशन ने भी सांसदों की इस पहल का स्वागत किया है. संगठन का कहना है कि पूरे 6 गीगाहर्ट्ज बैंड तक लगातार पहुंच बनाए रखना अगली पीढ़ी के वाई-फाई, उपभोक्ताओं और कारोबारों के हित में है.

लॉ मेकर्स ने ट्रंप प्रशासन से 22 अगस्त तक इस पूरे मामले पर लिखित जवाब देने को कहा है. इस पत्र पर राजा कृष्णमूर्ति, डॉन बेकन, कैथी कास्टर, डेबी डिंगेल, सारा एलफ्रेथ, जोश गॉटहाइमर, क्रिसी हूलाहन और डैरिन ला हूड सहित कई अन्य लॉ मेकर्स ने भी हस्ताक्षर किए हैं.

बता दें कि वर्ल्ड रेडियोकम्युनिकेशन कॉन्फ्रेंस का आयोजन इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन द्वारा किया जाता है.

पीएम