
इस्लामाबाद, 10 जून . Pakistan अधिकृत कश्मीर (पीओके) में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच Pakistanी सुरक्षा बलों पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग करने के आरोप लगे हैं.
एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दशकों से आर्थिक उपेक्षा, Political अधिकारों की कमी और संसाधनों के कथित शोषण से नाराज लोग सड़कों पर उतरे हैं, जिनके खिलाफ आंसू गैस, पानी की बौछार, गोलीबारी और बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियों का इस्तेमाल किया गया.
रिपोर्ट के अनुसार, हाल के दिनों में मीरपुर, मुजफ्फराबाद, रावलाकोट, नीलम और अन्य इलाकों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए. जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) जैसे संगठनों के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने गेहूं और बिजली जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में कमी, बाहरी लोगों के लिए आरक्षित सीटों को समाप्त करने, Political अधिकारों की बहाली और विशेषाधिकार प्राप्त वर्गों को मिलने वाली सुविधाओं को खत्म करने की मांग की.
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए Pakistanी सुरक्षा बलों ने आंसू गैस, वाटर कैनन और गोलियों का इस्तेमाल किया. इसमें कहा गया है कि कम से कम 11 से 12 लोगों की मौत हुई है और 70 से अधिक लोग घायल हुए हैं. साथ ही पीओके में इंटरनेट सेवाएं भी निलंबित कर दी गई हैं. हालांकि प्रदर्शनकारियों का दावा है कि वास्तविक मृतकों और घायलों की संख्या इससे अधिक हो सकती है तथा कई लोगों को हिरासत में लिया गया है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे पहले भी महंगाई, संसाधनों के दोहन और प्रशासनिक विफलताओं के खिलाफ हुए आंदोलनों पर इसी तरह बल प्रयोग किया गया था. इसमें आरोप लगाया गया है कि मंगला बांध और नीलम-झेलम जैसी परियोजनाओं का लाभ Pakistan को मिलता है, जबकि स्थानीय लोगों को इसका समुचित फायदा नहीं मिल पाता.
रिपोर्ट के मुताबिक, पीओके के लोगों की मुख्य शिकायतें गरीबी, बेरोजगारी, अविकास और स्थानीय संसाधनों के कथित दोहन से जुड़ी हैं. प्रदर्शनकारी स्थानीय प्रशासन को अधिक अधिकार, जवाबदेही और संसाधनों पर स्थानीय लोगों का हक सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं.
इस बीच, Pakistan मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) ने भी पीओके में बढ़ते तनाव और प्रदर्शनकारियों तथा सुरक्षा कर्मियों की मौत पर चिंता व्यक्त की है. आयोग ने सभी पक्षों से तत्काल तनाव कम करने और सभी मौतों व घायल मामलों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है.
एचआरसीपी ने कहा कि संवैधानिक बदलावों की मांगों का समाधान शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और प्रतिनिधिक प्रक्रियाओं के जरिए किया जाना चाहिए, न कि हिंसा और टकराव के माध्यम से.
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डीएससी
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