विशाखापट्टनम में आरएसएस की अखिल भारतीय समन्वय बैठक, जनसांख्यिकीय बदलाव और नशा मुक्ति पर होगा मंथन

विशाखापट्टनम, 18 अगस्त . राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की अखिल भारतीय समन्वय बैठक 19 से 21 अगस्त तक विशाखापट्टनम के समीप गुड़िलोवा स्थित विज्ञान विहार विद्यालय में आयोजित होगी. बैठक से पहले Tuesday को आयोजित प्रेस ब्रीफिंग में संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने बताया कि इस महत्वपूर्ण बैठक में देश की वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों, जनसांख्यिकीय बदलाव, नशा मुक्ति, पंच परिवर्तन और भारतीय विकास मॉडल जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा की जाएगी.

आंबेकर ने बताया कि हर वर्ष आयोजित होने वाली इस बैठक में संघ की प्रेरणा से कार्य कर रहे 32 संगठनों के प्रमुख पदाधिकारी हिस्सा लेंगे. बैठक में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, Government्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, सभी सह Government्यवाह तथा संघ के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी भी उपस्थित रहेंगे.

उन्होंने बताया कि भारतीय मजदूर संघ, विश्व हिंदू परिषद, भारतीय जनता पार्टी, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, भारतीय किसान संघ, राष्ट्र सेविका समिति सहित विभिन्न संगठनों के राष्ट्रीय अध्यक्ष, महामंत्री, संगठन मंत्री और चयनित कार्यकर्ता बैठक में भाग लेंगे. कुल 49 महिलाओं सहित 253 प्रमुख कार्यकर्ताओं और संघ के पदाधिकारियों को मिलाकर 327 प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है.

सुनील आंबेकर ने स्पष्ट किया कि यह कोई निर्णय लेने वाली कार्यकारी बैठक नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य समाज के विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत संगठनों के अनुभवों का आदान-प्रदान और आपसी समन्वय को मजबूत करना है. इसके साथ ही समसामयिक राष्ट्रीय और सामाजिक विषयों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा.

बैठक में देश की वर्तमान स्थिति, सामाजिक परिवर्तन और चुनौतियों पर चर्चा होगी. खास तौर पर जनसंख्या असंतुलन, डेमोग्राफिक बदलाव और उससे पैदा होने वाली चिंताओं एवं उनके संभावित समाधान पर विचार किया जाएगा. इसके अलावा युवाओं को नशे की लत से बचाने के उपायों और नशा मुक्ति अभियान को प्रभावी बनाने को लेकर भी चर्चा की जाएगी.

संघ शताब्दी वर्ष के अवसर पर तय किए गए ‘पंच परिवर्तन’ विषय भी बैठक के मुख्य एजेंडे में शामिल रहेंगे. इनमें सामाजिक समरसता, पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली, कुटुंब प्रबोधन, ‘स्व’ का भाव तथा नागरिक कर्तव्यों का पालन शामिल है. बैठक में इन विषयों को आगे बढ़ाने में विभिन्न संगठनों की भूमिका और भविष्य की कार्ययोजना पर भी चर्चा होगी.

आंबेकर ने कहा कि विकास केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके सामाजिक, सांस्कृतिक और मानवीय आयाम भी हैं. इसी दृष्टिकोण से बैठक में एक समग्र ‘भारतीय विकास मॉडल’ पर विस्तृत विचार-विमर्श किया जाएगा, ताकि विभिन्न संगठन भविष्य की रणनीति तैयार कर सकें.

इस दौरान उन्होंने बताया कि संघ के शताब्दी वर्ष में समाज के बीच आरएसएस के प्रति आकर्षण में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है. संघ की वेबसाइट पर ‘जॉइन आरएसएस’ के माध्यम से जनवरी से जुलाई 2025 के बीच 55,423 लोगों ने पंजीकरण कराया था, जबकि 2026 की इसी अवधि में यह संख्या बढ़कर 1,23,287 हो गई है. जुलाई 2025 में 9,718 लोगों ने पंजीकरण कराया था, जबकि जुलाई 2026 में यह संख्या बढ़कर 24,086 पहुंच गई. पंजीकरण कराने वालों में लगभग 65 प्रतिशत युवा 30 वर्ष से कम आयु के हैं, जबकि 85 प्रतिशत लोग 40 वर्ष से कम आयु वर्ग के हैं.

प्रेस ब्रीफिंग के दौरान दक्षिण मध्य क्षेत्र के सह संघचालक दूसी रामकृष्ण और अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख प्रदीप जोशी भी मौजूद रहे.

एएमटी/डीकेपी