
New Delhi, 25 मई . महिला कांग्रेस अध्यक्ष अलका लांबा ने जंतर-मंतर पर महिलाओं की सुरक्षा और महिला आरक्षण की मांग को लेकर किए गए प्रदर्शन से जुड़े मामले में खुद को दोषी ठहराए जाने पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. अलका लांबा ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि उन्हें पहले से ही इस फैसले की आशंका थी. वह अपने आंदोलन को लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत किया गया शांतिपूर्ण प्रदर्शन मानती हैं.
अलका लांबा ने कहा कि यह मामला जुलाई 2024 का है, जब संसद का मानसून सत्र चल रहा था. उस दौरान वह बतौर महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अपनी सहयोगी महिलाओं के साथ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही थीं. प्रदर्शन का उद्देश्य महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने और देश में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सख्त कदम उठाने की मांग करना था.
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान Police ने दबाव में आकर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की और बाद में चार्जशीट भी दाखिल कर दी. लांबा ने कहा कि 2024 से लेकर 2026 तक वह लगातार अदालत में पेश होती रही हैं और अब उन्हें दोषी करार दिया गया है.
उन्होंने कहा, “मेरा अपराध सिर्फ इतना था कि मैंने महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों के लिए आवाज उठाई. अगर महिलाओं के अधिकारों की बात करना अपराध है, तो मैं यह लड़ाई आगे भी जारी रखूंगी.”
कांग्रेस नेता ने यह भी दावा किया कि पूरे मामले में केवल उन्हीं को आरोपी बनाया गया, जबकि प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल थीं. उन्होंने कहा कि Police का आरोप है कि उन्होंने Policeकर्मियों पर हमला किया और उन्हें ड्यूटी निभाने से रोका, जबकि प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण था. उनके मुताबिक प्रदर्शनकारी बिना किसी हथियार के संविधान की प्रतियां हाथ में लेकर बैठे थे और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें रख रहे थे.
अलका लांबा ने कहा कि वह किसी भी सजा से डरने वाली नहीं हैं. उन्होंने कहा कि देश में महिलाओं की सुरक्षा एक गंभीर मुद्दा है और इस पर आवाज उठाने वालों को ही निशाना बनाया जा रहा है.
उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को लेकर पूरे देश में चिंता का माहौल है, लेकिन जब लोग न्याय और सुरक्षा की मांग करते हैं, तो उन्हें ही दोषी ठहराया जाता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि वह महिलाओं के अधिकारों और सुरक्षा के लिए अपनी लड़ाई आगे भी जारी रखेंगी.
–
एसएके
Skip to content