
रांची, 6 मई . Jharkhand के बहुचर्चित टेंडर घोटाला मामले में आरोपी पूर्व मंत्री आलमगीर आलम को Jharkhand हाईकोर्ट से फिर झटका लगा है. हाईकोर्ट ने उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने पीएमएल कोर्ट द्वारा उनके डिस्चार्ज पिटीशन को खारिज करने और उनके खिलाफ आरोप गठन के आदेश को चुनौती दी थी.
जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया. इससे पहले मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था. Enforcement Directorate (ईडी) की ओर से अधिवक्ता जोहेब हुसेन, एके दास और सौरव कुमार ने पक्ष रखा.
मामला टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है. ईडी ने इस मामले में पूर्व मंत्री आलमगीर आलम, उनके ओएसडी संजीव लाल और उनके घरेलू सहायक जहांगीर आलम के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है.
इससे पहले, 6 मई 2024 को ईडी ने रांची में बड़े पैमाने पर छापेमारी की थी. इस दौरान संजीव लाल के सहायक जहांगीर आलम के आवास से करीब 32.2 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए थे. वहीं, संजीव लाल के आवास से 10.5 लाख रुपये और उनके सचिवालय स्थित कार्यालय से 2.3 लाख रुपये बरामद हुए थे. एक डायरी भी जब्त की गई, जिसमें कथित तौर पर कमीशन के लेन-देन का ब्योरा दर्ज था.
जांच के बाद, 15 मई 2024 को आलमगीर आलम को गिरफ्तार कर लिया गया था. ईडी ने आरोप लगाया है कि सरकारी टेंडर आवंटित करने के बदले कमीशन वसूलने के लिए एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था.
जांच एजेंसी के मुताबिक, ठेकेदारों को कथित तौर पर कुल ठेके की कीमत का लगभग तीन प्रतिशत कमीशन के तौर पर देना पड़ता था. इसमें से, लगभग 1.35 प्रतिशत राशि कथित तौर पर तत्कालीन मंत्री तक उनके निजी सचिव के माध्यम से पहुंचाई जाती थी, जबकि 0.65 से 1 प्रतिशत राशि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों में बांटी जाती थी और शेष राशि इंजीनियरों सहित अन्य कर्मचारियों के बीच साझा की जाती थी.
इस मामले में हाईकोर्ट के ताजा फैसले के बाद अब पीएमएलए कोर्ट में आरोप तय होने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और मामले की सुनवाई तेज होने की संभावना है.
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एसएनसी/डीकेपी
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