
Mumbai , 29 जुलाई . Maharashtra के शहरी स्थानीय निकायों (जिनमें नगर निगम, नगरपालिकाएं और नगर परिषद शामिल हैं) में सरकारी फंड से चल रही विकास परियोजनाओं में पारदर्शिता और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए राज्य Government ने Wednesday को एडवांस्ड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने का फैसला किया.
अब सार्वजनिक निर्माण कार्यों के तकनीकी और सामाजिक ऑडिट के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), जियो-टैगिंग और जीआईएस मैपिंग का इस्तेमाल किया जाएगा.
यह फैसला राज्य विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान उपChief Minister एकनाथ शिंदे की घोषणा के बाद लिया गया है. उन्होंने शहरी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में जवाबदेही, पारदर्शिता और गुणवत्ता बढ़ाने के लिए टेक्नोलॉजी-आधारित ऑडिट को चरणबद्ध तरीके से लागू करने पर जोर दिया था.
उस वादे को पूरा करते हुए राज्य Government ने एक आधिकारिक सरकारी प्रस्ताव (जीआर) जारी किया है. इसके तहत म्युनिसिपल एडमिनिस्ट्रेशन निदेशालय के कमिश्नर और डायरेक्टर की अध्यक्षता में एक विशेष अध्ययन समूह बनाया गया है.
शहरी स्थानीय निकायों पर अक्सर सड़क निर्माण, जलापूर्ति योजनाओं और सिविल परियोजनाओं में घटिया निर्माण, बुनियादी ढांचे के खराब रखरखाव और फंड के गलत इस्तेमाल के आरोप लगते रहे हैं.
जीआर में कहा गया है कि जियो-टैगिंग और एआई के जरिए रियल-टाइम ट्रैकिंग से अधिकारी अब हर काम के चरण की सीधे निगरानी कर सकेंगे. इससे गुणवत्ता के मानकों और कामकाज में पारदर्शिता में काफी सुधार होने की उम्मीद है.
जीआर में आगे कहा गया, “नए ऑडिट ढांचे में आधुनिक टेक्नोलॉजी और समुदाय की भागीदारी को शामिल किया जाएगा. एआई टूल्स प्रोजेक्ट की सटीकता का विश्लेषण करेंगे और निर्माण की कुल गुणवत्ता का मूल्यांकन करेंगे. रियल-टाइम ऑनलाइन निगरानी से भौतिक प्रगति पर नजर रखी जाएगी ताकि यह पक्का किया जा सके कि प्रोजेक्ट तय समयसीमा के भीतर पूरे हों. ऑडिट प्रक्रिया में सरकारी अधिकारियों के अलावा स्थानीय नागरिक, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए), एनजीओ, तकनीकी विशेषज्ञ, शैक्षणिक संस्थान और जन प्रतिनिधि भी शामिल होंगे.”
नई बनी कमेटी को एक महीने के भीतर राज्य Government को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का काम सौंपा गया है.
कमेटी को मौजूदा तकनीकी और वित्तीय ऑडिट ढांचे में सुधार के सुझाव देने, सटीक काम के लिए ठोस रणनीतियां सुझाने, स्थानीय समुदायों पर नागरिक परियोजनाओं के ठोस असर और सीधे फायदों का आकलन करने और यह पक्का करने के लिए ठोस उपाय तैयार करने का काम सौंपा गया है कि चल रहे और प्रस्तावित बुनियादी ढांचे के काम गुणवत्ता के मानकों और समयसीमा को पूरा करें.
इससे पहले मानसून सत्र के दौरान डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने विधानसभा को बताया था कि एआई, जियो-टैगिंग और जीआईएस मैपिंग के इस्तेमाल से राज्य के शहरी स्थानीय निकायों में विकास परियोजनाओं के लिए एक स्वतंत्र ऑडिट और निगरानी व्यवस्था बनेगी.
उन्होंने यह भी कहा कि टेक्नोलॉजी पर आधारित यह निगरानी ढांचा Maharashtra में शहरी प्रशासन को आधुनिक बनाने की एक बड़ी मुहिम का हिस्सा है. यह ढांचा राज्य की उन पहलों के साथ मिलकर काम करेगा, जिनमें बीडीडी चॉल, मोतीलाल नगर और कमाठीपुरा जैसे बड़े पुनर्विकास प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा करना और पब्लिक खर्च में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए शहरी विकास विभाग (यूडीडी) में प्रोजेक्ट ट्रैकिंग को एक जैसा बनाना शामिल है.
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एससीएच/डीकेपी
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