
New Delhi, 10 जून . केंद्र Government ने फ्लेक्स फ्यूल वाहनों के लिए ई85 ईंधन को लॉन्च कर दिया है. अब ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के साथ भविष्य में एथेनॉल आधारित ईंधन के विस्तार को लेकर चर्चा कर रही है. यह जानकारी पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी की ओर से Wednesday को दी गई.
समाचार एजेंसी के साथ बातचीत में एथेनॉल मिश्रण में India की प्रगति का जिक्र करते हुए पुरी ने कहा कि देश ने तय समय से पहले ही अपने लक्ष्यों को हासिल कर लिया है.
उन्होंने कहा कि पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण की मात्रा 2014 में 1.5 प्रतिशत से बढ़कर नवंबर 2022 में 10 प्रतिशत हो गई है, जबकि 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य समय से पहले ही हासिल कर लिया गया.
पुरी ने कहा, “2014 में पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा 1.5 प्रतिशत थी, जो नवंबर 2022 में बढ़कर 10 प्रतिशत हो गई है. हमारा लक्ष्य इसे 2030 तक 20 प्रतिशत तक ले जाना था, लेकिन हमने इसे समय से पहले 2024 में हासिल कर लिया.”
मंत्री ने आगे कहा, “फिलहाल, हम इंडस्ट्री के साथ बड़े पैमाने पर बातचीत कर रहे हैं, जिसमें हमारी ऑटोमोबाइल एसोसिएशन, सियाम और दूसरे संगठन शामिल हैं. इसी बीच, हमने ई85 फ्यूल पेश किया है. हालांकि, ई85 को सिर्फ ई85-कम्पैटिबल फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों के लिए ही पेश किया गया है.”
Government की व्यापक ऊर्जा रणनीति पर पुरी ने कहा कि भारत, घरेलू स्तर पर खोज और उत्पादन बढ़ाकर, बायोफ्यूल की अधिक ब्लेंडिंग करके और रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता का विस्तार करके ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर लगातार बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि Prime Minister Narendra Modi द्वारा घोषित ‘समुद्र मंथन’ पहल के तहत, नए कुएं खोदने और घरेलू ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 90,000 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं.
हाल ही में ईंधन की कीमतों में हुई बढ़ोतरी पर चिंता जताए जाने के बाद, मंत्री ने कहा कि केंद्र Government द्वारा कई बार एक्साइज ड्यूटी घटाने की वजह से दिल्ली में पेट्रोल की कीमतें चार साल पहले की तुलना में कम हैं. उन्होंने बताया कि Government ने नवंबर 2021, मई 2022 और हाल ही में पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम की थी, जबकि बीजेपी शासित कई राज्यों ने भी ईंधन पर वैट कम किया था.
Prime Minister उज्ज्वला योजना के तहत मिलने वाले सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडरों की संख्या नौ से घटाकर चार करने के बारे में पुरी ने कहा कि यह फैसला सब्सिडी वाले सिलेंडरों के गलत इस्तेमाल की रिपोर्ट के आधार पर लिया गया था.
उनके मुताबिक, कुछ लाभार्थी सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडरों का इस्तेमाल कमर्शियल कामों के लिए कर रहे थे या उन्हें दोबारा बेच रहे थे, जबकि उन्हें पूरे कोटे की जरूरत नहीं थी.
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एबीएस
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