आखिर क्यों सबके अपने हो गए रामविलास पासवान

पटना (Patna) . केंद्रीय मंत्री रहे दिवंगत दलित नेता रामविलास पासवान खूब चर्चा में हैं. ऐसा क्या हुआ कि सभी पार्टियां उनको अपना बता रही हैं? उन्हें भारत रत्न दिए जाने की मांग भी उठ गई है.बिहार (Bihar) के राजनीतिक गलियारे में आजकल फिर लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) चर्चा में है और सामने है बिहार (Bihar) विधानसभा की दो सीटों, तारापुर व कुशेश्वर स्थान में होने वाला उपचुनाव. जाहिर है, बात दलित वोटों की है इसलिए पार्टियों का सक्रिय व सजग होना लाजिमी है. एलजेपी के संस्थापक व पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की मौत के बाद बिहार (Bihar) विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) के समय उनके पुत्र चिराग पासवान द्वारा मुख्यमंत्री (Chief Minister) नीतीश कुमार पर निशाना साधने तथा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का घटक दल होने के बावजूद एकला चलो की रणनीति पर अमल करते हुए कई सीटों पर जनता दल यूनाइटेड की हार का सबब बनने से एलजेपी चर्चा में थी. इसके बाद यह पार्टी चर्चा में तब आई जब रामविलास पासवान की राजनीतिक विरासत का असली वारिस घोषित करने की होड़ में पार्टी टूट गई. एक गुट के मुखिया बने उनके भाई पशुपति पारस तो दूसरे गुट के प्रमुख बने उनके बेटे चिराग पासवान. दोनों में यह साबित करने की होड़ मच गई कि असली वारिस वे ही हैं. मामला निर्वाचन आयोग में गया. दोनों को नया नाम व चुनाव चिन्ह दिया गया है. पुत्र होने के नाते चिराग का दावा तो है ही, लेकिन पशुपति पारस भी कहते रहे हैं कि मैं ही रामविलास पासवान की राजनीतिक विरासत का असली उत्तराधिकारी हूं, चिराग तो अपने पिता की संपत्ति के उत्तराधिकारी हैं दिल्ली में राहुल गांधी, पटना (Patna) में नीतीश कुमार बीते आठ अक्टूबर को रामविलास पासवान की पहली पुण्यतिथि मनाई गई. भाई पशुपति पारस ने इस मौके पर पटना (Patna) स्थित प्रदेश कार्यालय में कार्यक्रम का आयोजन किया तो बेटे चिराग पासवान ने दिल्ली स्थित सरकारी आवास 12 जनपथ में. दोनों के बीच शक्ति प्रदर्शन की ऐसी होड़ थी कि दोनों ने ही बड़े नेताओं को आमंत्रित किया था. दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में अन्य नेताओं के अलावा कांग्रेस नेता राहुल गांधी, केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह तथा राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के अध्यक्ष लालू प्रसाद अपनी पत्नी राबड़ी देवी के साथ पहुंचे. सभी ने पासवान के तैल चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी. इसके बाद चिराग ने इसे लेकर ट्वीट भी किया. रामविलास पासवान को मौसम विज्ञानी की संज्ञा देने वाले लालू प्रसाद ने उनकी पहली पुण्यतिथि पर उन्हें भारत रत्न देने की मांग कर दी.दरअसल, इसी बहाने वे बीजेपी व जदयू को पर्दे के बाहर लाने की जुगत में हैं. वहीं पटना (Patna) में आयोजित कार्यक्रम में उनके भाई व केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस के निमंत्रण पर मुख्यमंत्री (Chief Minister) नीतीश कुमार, शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी पहुंचे. उन्होंने पासवान के साथ छात्र (student) जीवन के अपने संबंधों की चर्चा भी की.

इससे पहले हिंदू कैलेंडर के हिसाब से बीते 12 सितंबर को केंद्रीय मंत्री पासवान की पहली बरसी पटना (Patna) में मनाई गई थी. इस आयोजन से नीतीश कुमार समेत जदयू नेताओं ने दूरी बना ली थी जबकि बड़ी संख्या में भाजपा नेता शामिल हुए थे. इसकी वजह थे आयोजनकर्ता चिराग पासवान. हालांकि, एलजेपी में टूट के बावजूद चिराग ने चाचा पशुपति पारस को आमंत्रित किया था और वह इसमें शामिल भी हुए. क्यों जरूरी हैं रामविलास? दरअसल, एलजेपी के संस्थापक व पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान बिहार (Bihar) में दलितों के एकछत्र नेता थे. 1971 में जब इंदिरा गांधी ने गरीबी हटाओ का नारा दिया था, तभी से दलित वोटरों को लुभाने की राजनीति शुरू हुई थी. इसके बाद के दौर में पासवान ने दलितों तथा अन्य जातियों को लेकर राजनीति की. इस दरम्यान भोला पासवान शास्त्री और रामसुंदर दास की लोकप्रियता में कमी आई और रामविलास पासवान बिहार (Bihar) में दलितों के नायक बनकर उभरे. बिहार (Bihar) के खगडिय़ा जिले के शहरबन्नी गांव में जन्मे रामविलास पासवान पुलिस (Police) की नौकरी छोडकर राजनीति में आए थे. वह पहली बार 1969 में कांग्रेस विरोधी मोर्चा, संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी की ओर से खगड़िया की अलौली (सुरक्षित) विधानसभा सीट से विधायक बने तथा 1977 में पहली बार सांसद (Member of parliament) बने. इसी साल देश की जनता इनके नाम से परिचित हुई. वजह थी रिकार्ड मतों से हुई जीत. इसके बाद अगले चार दशक तक वह राष्ट्रीय राजनीति में छाए रहे.

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