एक हार के बाद भाजपा में खुला मुसीबतों का पिटारा

अंतरकलह सामने आई, मलैया सबके निशाने पर, भितरघात के आरोपों को नकारा, केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल ने की केंद्रीय नेतृत्‍व से शिकायत

सागर . दमोह उपचुनाव में कांग्रेस के हाथों करारी हार के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में बवाल शुरू हो गया है. कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में आने के बाद पार्टी की ओर से चुनाव में उतरे राहुलसिंह लोधी ने चुनाव परिणाम घोषित होते ही अपनी हार का ठीकरा पूर्व मंत्री जयंत मलैया पर फोड़ दिया. इसके साथ ही पार्टी में जबर्दस्‍त आरेाप प्रत्‍यारोप का सिलसिला शुरू हो गया. जानकारों के अनुसार मामला शीर्ष नेतृत्‍व तक पहुंच गया है.

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जयंत मलैया ने सोमवार (Monday) को राहुल सिंह के बयान को नकारते हुए दो टूक शब्‍दों में कह दिया कि दमोह में भाजपा नहीं बल्कि खुद लोधी अपनी छवि के कारण हारे हैं. पार्टी के सामने अपना पक्ष रखूंगा. लेकिन उधर, गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने प्रेस के सामने एक शेर पढ़ते हुए कह दिया कि दमोह अपने जयचंदों के कारण हारे हैं. पार्टी सूत्रों का कहना है कि उनका इशारा भी मलैया परिवार की ओर ही था. हालांकि वे कमल नाथ पर निशाना साध रहे थे लेकिन इस बारे में उनकी भावना भी साफ हो गई.


पटेल ने लिखा शिकायती पत्र

इस बीच, एक बड़ी खबर यह सामने आ रही है कि केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल ने इस संबंध में प्रधानमंत्री और गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिख कर जयंत मलैया की शिकायत की है और साफ कहा है कि उनके परिवार की वजह से ही दमोह का उपचुनाव हारे हैं. पटेल ने रविवार (Sunday) को मतगणना जारी रहते ही ट्वीट कर कांग्रेस के प्रत्‍याशी अजय टंडन को बधाई दे दी थी. उसके बाद ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया ने भी परिणाम की प्रतीक्षा किए बिना ट्वीट कर टंडन को बधाई दे दी.


हार का पहले से हो चुका था आभास

इसके बाद सोशल मीडिया (Media) पर यह सवाल उठने लगे थे कि क्‍या भाजपा नेताओं को पता था कि पार्टी दमोह का चुनाव हार रही है. जानकारों का कहना है कि उस वक्‍त तक कांग्रेस की बढ़त काफी लंबी हो चुकी थी और बाकी बचे राउंड में कोई बड़ा उलटफेर होने की संभावना भी नहीं थी इसलिए दोनों नेताओं के ट्वीट को लेकर ज्‍यादा मतलब निकालने सही नहीं हैं. अलबत्ता अब प्रहलाद पटेल की शीर्ष नेतृत्‍व से त्‍वरित शिकायत की बात सामने आते ही साफ हो गया है कि वे परिणाम के बारे में जान चुके थे.

राहुल सिंह लोधी का भविष्‍य

इस हार के बाद अब राहुलसिंह लोधी के भविष्‍य को लेकर अटकलों का बाजारी गर्म हो गया है. एक तो उन्‍होंने कांग्रेस छोड़ कर भाजपा का हाथ थामा लेकिन चुनाव नहीं जीत पाने के कारण अब पार्टी में उन्‍हें कितनी अहमियत मिलेगी, कहना कठिन है. जानकारों का कहना है कि बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि उनके भिरतघात वाले बयानों पर पार्टी किस तरह रिएक्‍ट करेगी. हालांकि पटेल जैसे कद्दावर मंत्री के इस मामले में सीधे शामिल होने से माना जा रहा है कि लोधी के आरोपों को बल मिलेगा और उन्‍हें संभवत: पार्टी में अपनी जड़ें मजबूत करने का मौका भी दिया जाए. लेकिन बुंदेलखंड में काफी राजनीतिक उठापटक होना तय है.


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