
New Delhi, 11 जून . पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच Government ने Thursday को कहा कि India की उर्वरक सुरक्षा मजबूत बनी हुई है और चालू खरीफ बुआई सीजन की मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त स्टॉक मौजूद है.
साथ ही, Government ने यह भी संकेत दिया कि ग्लोबल यूरिया की कीमतों में भारी गिरावट के बाद, चालू वित्त वर्ष के लिए उर्वरक सब्सिडी के बोझ की समीक्षा की जा सकती है.
पश्चिम एशिया में हाल की घटनाओं पर मंत्रालयों की प्रेस कॉन्फ्रेंस में रसायन और उर्वरक मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस. शर्मा ने कहा कि देश में उर्वरक का स्टॉक संतोषजनक स्थिति में है और खेती की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है.
शर्मा ने कहा, “देश में उर्वरक का स्टॉक संतोषजनक स्थिति में है. India की उर्वरक सुरक्षा पहले की तरह ही मजबूत बनी हुई है.”
उन्होंने बताया कि 2026-27 के लिए Government का शुरुआती फर्टिलाइजर सब्सिडी अनुमान मौजूदा बाजार के रुझानों के आधार पर तैयार किया गया था.
हालांकि, ग्लोबल मार्केट में हाल की घटनाओं, खासकर यूरिया इंपोर्ट के नए टेंडर में कम दरों का पता चलने के बाद, सब्सिडी का फिर से आकलन करने की जरूरत पड़ सकती है.
शर्मा के अनुसार, सप्लायर्स द्वारा दी गई मात्रा की पुष्टि करने और कुल इंपोर्ट की जरूरत का आकलन करने के बाद Government सब्सिडी के अनुमानों पर फिर से विचार करेगी.
यह दोबारा आकलन तब किया जा रहा है जब सरकारी कंपनी नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड को 1.7 मिलियन टन यूरिया इंपोर्ट करने के टेंडर के मुकाबले 6 मिलियन टन से ज्यादा यूरिया के लिए बोलियां मिली हैं.
ग्लोबल मार्केट में यूरिया की कीमतों में भारी गिरावट से फर्टिलाइजर सब्सिडी पर होने वाले खर्च को काबू में रखने में मदद मिलने की उम्मीद है, साथ ही आने वाले रबी सीजन के लिए न्यूट्रिएंट्स की पर्याप्त उपलब्धता भी सुनिश्चित होगी.
शर्मा ने उर्वरकों की लगातार आपूर्ति सुनिश्चित करने का श्रेय लंबे समय के सप्लाई एग्रीमेंट, विदेशों में जॉइंट वेंचर और विदेशों में भारतीय मिशनों की मिली-जुली कोशिशों को दिया.
उन्होंने बताया कि India ने ओमान, मलेशिया, वियतनाम, जॉर्जिया, नाइजीरिया, रूस, फिनलैंड, मिस्र, अल्जीरिया, तुर्की और नीदरलैंड जैसे देशों से यूरिया की आपूर्ति हासिल की है.
डीएपी और एनपीके फर्टिलाइजर रूस, मोरक्को, मिस्र, अमेरिका, जॉर्डन, दक्षिण कोरिया, ट्यूनीशिया और सऊदी अरब जैसे देशों से मंगाए गए हैं.
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एबीएस
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