जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद की कमर तोड़ने को ऐक्शन

जम्मू (Jammu) . जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद की कमर तोड़ने के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी सक्रिय हो गई है. एनआईए ने एक नया केस दर्ज करते हुए द रेजिस्टेंस फोर्स और पाकिस्तानी आतंकी संगठनों के ओवरग्राउंड वर्कर्स के 16 ठिकानों पर छापेमारी की है. ये ओवरग्राउंड वर्कर्स जैश-ए-मोहम्मद, हिजबुल मुजाहिदीन, अल बदर और अन्य संगठनों से जुड़े हुए हैं. हाल ही में कश्मीर घाटी में नागरिकों और अन्य लोगों पर हुए आतंकवादी हमलों में द रेजिस्टेंस फोर्स का हाथ बताया जा रहा है और ये ओवरग्राउंड वर्कर्स इसे मदद करते रहे हैं. राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने 10 अक्टूबर को जम्मू-कश्मीर में माहौल बिगाड़ने के आरोप में नई एफआईआर (First Information Report) दर्ज की है.

इसी के तहत अब एजेंसी ने कार्रवाई शुरू की है. एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि टीआरएफ को मदद करने वाले हर ओवरग्राउंड वर्कर की जांच की जाएगी. यही लोग पाकिस्तानी आतंकवादियों की घाटी में दहशत फैलाने में मदद करते रहे हैं. द रेजिस्टेंस फोर्स का गठन पाकिस्तान की सेना और आईएसआई ने किया है. भारत सरकार की ओर से जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 और 35 ए हटाए जाने के बाद से पाक सेना ने यह साजिश रची है. भारतीय एजेंसियों के मुताबिक यह संगठन लश्कर-ए-तैयबा का ही एक नया रूप है, जिसे नए नाम से लॉन्च किया गया है. हाल ही में घाटी में हुए आतंकी हमलों की जिम्मेदारी भी रेजिस्टेंस फोर्स ने ली थी. यही नहीं जांचकर्ताओं का कहना है कि जून में 5.5 किलोग्राम आईईडी मिलने के मामले में भी टीआरएफ का ही हाथ था. यह विस्फोटक ड्रोन का इस्तेमालल करते हुए जम्मू (Jammu) के बठिंडी इलाके में गिराया गया था. इसके अलावा जम्मू (Jammu) के ही एयर फोर्स स्टेशन में हुए ड्रोन अटैक्स में भी इसका ही हाथ बताया जा रहा है. बता दें कि बीते एक महीने में जम्मू (Jammu) कश्मीर में आम लोगों को भी निशाना बनाकर आतंकी हमले कर रहे हैं.

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