
हरिद्वार, 27 मई . आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज ने असली और नकली देवी-देवताओं को लेकर हुए विवाद की निष्पक्ष जांच की मांग की. उन्होंने कहा कि भ्रम से बचने और सनातन धर्म की गरिमा बनाए रखने के लिए तथ्यों के आधार पर सच्चाई सामने आनी चाहिए.
हरिद्वार में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (दूसरे गुट) की एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें पंजाब से आए उदासीन नया अखाड़ा के साधु-संतों और अखाड़े की प्रबंध समिति के प्रतिनिधियों ने भाग लिया. बैठक के बाद परिषद के अध्यक्ष डॉ. रवींद्र पुरी महाराज ने कहा कि पंजाब से आए संतों का कहना है कि असली देवता उनके पास हैं, जबकि हरिद्वार स्थित अखाड़े में नकली देवताओं का स्नान कराया जा रहा है.
आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज ने Monday को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि आज अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी जी महाराज (मंशा देवी के अध्यक्ष) ने आज यहां पर पेशी की. एक आचार्य होने के नाते सभी का भाव मेरे प्रति होता है. आज नया अखाड़ा उदासीन के कई सदस्य हमारे बीच आए.
उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि यह जांच का विषय है. एक तरफ जहां ये लोग दावा कर रहे हैं कि मेरे पास असली देवता हैं. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष ने भी जांच की मांग की है. फिलहाल मामले की जांच जारी है, लेकिन हम चाहते हैं कि Government की ओर से भी इसकी जांच की जाए. उत्तराखंड Government भी मामले की जांच करें, ताकि पूरी सच्चाई सामने आ सके.
उन्होंने आगे कहा कि मेरा कुल मिलाकर यही कहना है कि जो लोग पूरी सत्यता और निष्ठा के साथ काम कर रहे हैं, उनके हितों के साथ किसी भी प्रकार का कुठाराघात नहीं होना चाहिए. इसलिए हम मांग करते हैं कि पूरे मामले की विधिवत तरीके से जांच हो.
आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज ने कहा कि हम चाहते हैं कि यह पूरा विवाद सड़क पर नहीं जाए, इसलिए इस पूरे मामले को हमारे संज्ञान में लाया गया. पूरी स्थिति की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए हम पूरे मामले की गंभीरतापूर्वक जांच की पैरोकारी कर रहे हैं. हमें पूरा विश्वास है कि इससे समाज के बीच एक स्पष्टता आएगी और लोगों के बीच में यह संदेश जाएगा कि देवता किसी भी सूरत में नकली नहीं होते हैं, वो हमेशा से ही असली होते हैं. भगवती और देवी देवताओं पर किसी भी प्रकार की टिप्पणी नहीं होनी चाहिए और किसी भी प्रकार का अभद्र व्यवहार नहीं होना चाहिए.
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एसएचके/
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