बैंक खाता फ्रीज होने के मामले को अभिषेक बनर्जी ने कलकत्ता हाईकोर्ट में दी चुनौती

कोलकाता, 17 अगस्त . तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और पार्टी के डायमंड हार्बर Lok Sabha सांसद अभिषेक बनर्जी ने Monday को कलकत्ता हाई कोर्ट की एकल पीठ का रुख किया. उन्होंने अपने बैंक खाते को फ्रीज किए जाने के बैंक अधिकारियों के कदम को चुनौती दी है. यह कार्रवाई उनकी अमेरिका की प्रस्तावित यात्रा से ठीक पहले की गई है. अभिषेक को नेत्र संबंधी उपचार के लिए विदेश यात्रा की अनुमति Supreme Court ने दी है.

अभिषेक के वकील अयान भट्टाचार्य ने न्यायमूर्ति कृष्ण राव की एकल पीठ के समक्ष इस मामले में याचिका दायर की. अभिषेक पश्चिम बंगाल की पूर्व Chief Minister ममता बनर्जी के भतीजे हैं.

अपनी याचिका में अभिषेक बनर्जी के वकील ने दावा किया कि उनके मुवक्किल के बैंक खाते पर विदेश यात्रा से ठीक पहले डेबिट संबंधी प्रतिबंध लगा दिए गए हैं. डायमंड हार्बर सांसद के वकील ने यह भी दावा किया कि बैंक अधिकारियों ने उनके मुवक्किल को खाते को फ्रीज करने का कारण नहीं बताया.

अभिषेक के वकील ने मामले में तत्काल सुनवाई की मांग भी की. उन्होंने सवाल उठाया कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 107 को लागू किए बिना बैंक अधिकारी किसी व्यक्ति का बैंक खाता कैसे फ्रीज कर सकते हैं.

उन्होंने कहा कि उक्त धारा के अनुसार Police को खाते को फ्रीज करने के लिए पहले संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन करना होता है. हालांकि, अभिषेक के वकील ने दलील दी कि इस मामले में इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया.

न्यायमूर्ति राव ने याचिका स्वीकार कर ली और सवाल किया कि क्या अभिषेक के खिलाफ कोई जांच चल रही है. इसके जवाब में अभिषेक के वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल अदालत के आदेश के अनुसार जांच प्रक्रिया में सहयोग कर रहे हैं और इस मामले का बैंक खाता फ्रीज किए जाने से कोई संबंध नहीं है.

इसके बाद न्यायमूर्ति राव ने मामले से जुड़े सभी पक्षों को नोटिस जारी करने का आदेश दिया. मामले पर अगली सुनवाई 19 अगस्त को होगी.

बता दें कि पिछले सप्ताह Supreme Court के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने अभिषेक को आंख के इलाज के लिए तीन सप्ताह के लिए विदेश यात्रा की अनुमति दी थी. Supreme Court ने इस दौरान विदेश यात्रा पर लगी पाबंदी में राहत देने से कलकत्ता हाईकोर्ट के इनकार के फैसले को पलट दिया था.

हालांकि, विदेश यात्रा की अनुमति कुछ शर्तों के साथ दी गई थी. इनमें यह शर्त भी शामिल थी कि अभिषेक केवल अपने डिप्लोमेटिक पासपोर्ट पर ही यात्रा करेंगे और विदेश में अपने यात्रा कार्यक्रम तथा ठहरने की जगह की जानकारी जांच एजेंसी के साथ साझा करेंगे.

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