
तेल अवीव, 20 जून . इजरायली स्वास्थ्य मंत्रालय ने डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो की हालिया यात्रा करके लौटे शख्स को आइसोलेशन में रखा है. इबोला संक्रमण की आशंका के चलते जांच की जा रही है. मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि अंतिम जांच रिपोर्ट आने में करीब 48 घंटे लग सकते हैं.
बयान के अनुसार, मरीज का इलाज आइसोलेशन (अलग रखकर) में किया जा रहा है और उन लोगों का पता लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जो इस व्यक्ति के संपर्क में आए हो सकते हैं.
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि अभी यह पुष्टि नहीं हुई है कि व्यक्ति वास्तव में इबोला वायरस से संक्रमित है या नहीं.
इजरायली नागरिकों को खौफजदा न होने की अपील करते हुए कहा गया कि इबोला हवा के जरिए नहीं फैलता. इसका संक्रमण किसी बीमार व्यक्ति के लक्षणों के दौरान उसके सीधे संपर्क में आने या उसके खून, शरीर के तरल पदार्थों अथवा स्राव (सेक्रेशन) के संपर्क में आने से फैलता है.
Friday को ही इजरायली स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया था कि उन्हें एक ऐसे व्यक्ति के बारे में जानकारी मिली है, जिसने हाल ही में डीआरसी की यात्रा की है. इस यात्रा के बाद उसमें इबोला संक्रमण की आशंका जताई गई.
मंत्रालय के बयान के अनुसार, मरीज को हाइफा स्थित रैंबम मेडिकल सेंटर में स्थानांतरित कर दिया गया है. इस अस्पताल को इबोला मरीजों के इलाज के लिए नामित किया गया है. मंत्रालय ने इबोला की पुष्टि नहीं की थी.
इस बीच, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने Friday को इबोला संक्रमण की स्थिति को लेकर अपडेट जारी किया. संगठन के अनुसार, 17 जून तक देश के 31 स्वास्थ्य क्षेत्रों में इबोला के 896 मामलों की पुष्टि हो चुकी थी, जबकि 232 लोगों की मौत दर्ज की गई थी. वहीं, युगांडा में भी 19 संक्रमण के मामले सामने आए हैं और दो लोगों की मौत की पुष्टि हुई है.
डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टैड्रॉस ऐडहेनॉम घेबरेयेसस ने मौजूदा हालात पर चिंता जताते हुए डीआरसी के पूर्वी क्षेत्र में स्थानीय प्रशासन और एम23 सशस्त्र समूह से संघर्ष विराम की अपील की थी. उनका कहना था कि संघर्ष विराम होने से प्रभावित लोगों तक दवाएं और जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना आसान हो सकेगा.
डीआरसी के पूर्वी क्षेत्र में 20 लाख से अधिक विस्थापित रहते हैं. यहीं इबोला तेजी से फैल रहा है.
यह इलाका ऐसे क्षेत्र से जुड़ा हुआ है जहां व्यापार, पारिवारिक संबंधों और शरणार्थियों की आवाजाही बनी रहती है. युगांडा, रवांडा, बुरुंडी, तंजानिया और दक्षिण सूडान जैसे पड़ोसी देशों से लोग आते-जाते रहते हैं.
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केआर/
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