लोकतंत्र के लिए एक काला अध्याय, इंदिरा गांधी ने सत्ता के लोभ में लगाया था आपातकाल : संजय गुप्ता

Patna, 25 जून . ‘संविधान हत्या दिवस’ पर भाजपा विधायक संजय गुप्ता ने कहा कि हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने देश को आजादी दिलाई, उसी देश में आज से 51 वर्ष पहले तत्कालीन Prime Minister इंदिरा गांधी और कांग्रेस Government ने सत्ता के लोभ में आपातकाल लागू कर दिया था. उस दौरान Political और सामाजिक कार्यकर्ताओं का दमन किया गया तथा तानाशाही रवैये के तहत उन्हें जेल भेज दिया गया.

उन्होंने कहा कि यह कोई राष्ट्रीय सुरक्षा या विदेशी आक्रमण का मामला नहीं था, जिसके कारण आपातकाल लगाया गया हो. इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा इंदिरा गांधी के निर्वाचन को लेकर दिए गए फैसले के बाद सत्ता बचाने के लिए आपातकाल लगाया गया. सत्ता लोलुपता और अनैतिक कारणों से लागू किए गए इस आपातकाल के दौरान लोगों को जेल में डाला गया और उन्हें यातनाएं दी गईं.

संजय गुप्ता ने कहा कि उस समय मौलिक अधिकारों का हनन किया गया. लोगों को बिना उचित प्रक्रिया के जेल भेज दिया गया और उन्हें न्यायालय जाने का अधिकार भी नहीं था. लोकतंत्र के लिए यह एक काला अध्याय था. आज हम इस घटना को इसलिए याद करते हैं ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न आए और लोकतंत्र की रक्षा सुनिश्चित की जा सके.

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली Government जिस तरह काम कर रही है, वह सबके सामने है. इस मामले में भी त्वरित कार्रवाई की गई है. न्यायिक जांच की घोषणा हुई है और इसमें शामिल Policeकर्मियों को निलंबित भी किया गया है. आगे जांच के बाद दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा.

भरत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी के इस बयान पर कि यदि तीन दिन में न्याय नहीं मिला तो वे सड़क पर उतरेंगे, संजय गुप्ता ने कहा कि Government पूरी तरह न्याय देने के लिए प्रतिबद्ध है. आगे की कार्रवाई भी सभी लोग देख रहे हैं और Government निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कर रही है.

वहीं, इस मामले पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के बयान पर संजय गुप्ता ने कहा कि जो लोग शीशे के घरों में रहते हैं, उन्हें दूसरों पर पत्थर नहीं फेंकना चाहिए. तेजस्वी यादव के मुंह से ऐसी बातें शोभा नहीं देतीं. जिस तरह की Government वे चलाते रहे हैं, वैसी Government एनडीए में नहीं चलती. एनडीए Government न्याय के साथ विकास और सुशासन के सिद्धांत पर काम करती है. यहां जीरो टॉलरेंस की नीति लागू है.

पीआईएम/एबीएम