
ढाका, 31 जुलाई . बांग्लादेश में अप्रैल से जून 2026 के बीच भीड़ की हिंसा और Political संघर्षों में कुल 74 लोगों की मौत हुई. ढाका स्थित मानवाधिकार संगठन अधिकार की तिमाही रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान 33 लोगों की मौत भीड़ के हमलों में हुई, जबकि Political हिंसा में 41 लोगों की जान गई और 970 लोग घायल हुए.
रिपोर्ट के मुताबिक, भीड़ द्वारा मारे गए अधिकांश लोगों पर चोरी या डकैती का संदेह था. कुछ लोगों की हत्या गांवों में होने वाली अनौपचारिक पंचायतों (सलिश) के दौरान या धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में की गई. संगठन ने कहा कि यह स्थिति कानून व्यवस्था और न्याय प्रणाली पर लोगों के घटते भरोसे को दर्शाती है, जिसके कारण लोग खुद कानून हाथ में ले रहे हैं.
रिपोर्ट में बताया गया कि इस अवधि में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के भीतर आपसी संघर्ष की 57 घटनाएं दर्ज हुईं, जबकि नेशनल सिटिज़न पार्टी (एनसीपी) में दो घटनाएं सामने आईं. बीएनपी की अंदरूनी गुटबाजी में चार लोगों की मौत हुई और 400 लोग घायल हुए, जबकि एनसीपी के आंतरिक संघर्ष में 16 लोग घायल हुए.
रिपोर्ट के अनुसार, बीएनपी के भीतर विवाद जबरन वसूली, क्षेत्रीय वर्चस्व, खुदाई की मिट्टी की बिक्री, स्थानीय चुनाव टिकट, पार्टी सम्मेलन और Political कार्यक्रमों को लेकर थे. कई घटनाओं में आग्नेयास्त्र और अन्य घातक हथियारों का इस्तेमाल भी किया गया.
मानवाधिकार संगठन ने आरोप लगाया कि बीएनपी के कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं पर जबरन वसूली, जमीन कब्जाने, अपहरण, दुष्कर्म, शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी कार्यालयों पर हमले, Police के काम में बाधा डालने और Political विरोधियों पर हमले जैसे गंभीर आरोप लगे हैं.
रिपोर्ट में महिलाओं के खिलाफ अपराध पर भी चिंता जताई गई है. अप्रैल-जून के दौरान 255 दुष्कर्म पीड़ितों का रिकॉर्ड दर्ज किया गया, जिनमें 93 महिलाएं और 161 लड़कियां शामिल थीं. संगठन ने कहा कि डीएनए जांच की सीमित सुविधा, मेडिकल रिपोर्ट में देरी, पीड़ितों और गवाहों की सुरक्षा का अभाव तथा अदालतों में लंबित मामलों के कारण दुष्कर्म पीड़ितों को समय पर न्याय नहीं मिल पा रहा है.
रिपोर्ट में सुरक्षा एजेंसियों द्वारा कथित तीन न्यायेतर हत्याओं (एक्स्ट्रा ज्यूडिशियल किलिंग) का भी उल्लेख किया गया है. इनमें एक व्यक्ति की कथित तौर पर डिटेक्टिव ब्रांच की हिरासत में यातना से मौत, एक व्यक्ति की मादक पदार्थ नियंत्रण विभाग की कार्रवाई के दौरान पिटाई से मौत और एक मछुआरे की वन विभाग की गश्ती टीम द्वारा गोली मारकर हत्या शामिल है.
रिपोर्ट के अनुसार, 17 मई तक बांग्लादेश की 75 जेलों में उनकी क्षमता 43,157 के मुकाबले 85,000 से अधिक कैदी बंद थे. इस दौरान बीमारी के कारण 16 कैदियों की मौत हुई. संगठन ने जेलों में भीड़भाड़, अपर्याप्त भोजन और डॉक्टरों की कमी को गंभीर समस्या बताया.
मानवाधिकार संगठन ने यह भी कहा कि इस अवधि में पत्रकारों पर हमलों की कई घटनाएं हुईं. 17 पत्रकार घायल, पांच के साथ मारपीट, चार पर हमले और सात को धमकियां दी गईं.
रिपोर्ट के अंत में अधिकार ने न्यायेतर हत्याओं, हिरासत में यातना और अन्य मानवाधिकार उल्लंघनों की स्वतंत्र जांच कराने तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की.
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डीएससी
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