सोमवार से शुरू होगा मकर संक्रांति, पुण्य स्नान के लिए पहुंचे 15 लाख श्रद्धालु

कोलकाता, 13 जनवरी (‍उदयपुर किरण.). लाखों सालों पहले मकर संक्रांति में जिस मुहूर्त पर राजा सागर के साठ हजार पुत्रों को स्वर्ग से उतरी गंगा के स्पर्श से मुक्ति मिली थी उसी मुहूर्त में उसी गंगासागर पर पुण्य स्नान के लिए हर साल लाखों लोग उमड़ते हैं. हर साल आंकड़े घटते बढ़ते रहते हैं लेकिन इस साल प्रयागराज में अर्द्धकुंभ होने के बावजूद गंगासागर में रिकॉर्ड संख्या में पुण्यार्थी पहुंचे हैं. मकर संक्रांति से एक दिन पहले यानी रविवार को ही यहां पुण्यार्थियों का ताता लग गया है. तीर्थयात्रियों को सूचना और पुण्य स्नान संबंधित जानकारी देने वाले कपिल मुनि आश्रम प्रबंधन की ओर से बताया गया है कि मकर संक्रांति 14 जनवरी सोमवार को रात 8.05 बजे से शुरू हो रहा है लेकिन पुण्‍य स्‍नान का समय 15 जनवरी मंगलवार को सुबह 7.19 बजे से 12.30 बजे तक निर्धारित किया गया है. पुण्‍य स्‍नान की कुल अवधि 5 घंटे 11 मिनट की है.पुण्‍य स्‍नान की अवधि सुबह 7.19 बजे से 09.02 बजे तक है जबकि महापुण्‍य स्‍नान की कुल अवधि 1 घंटा 43 मिनट की है.

बंगाल के आपदा प्रबंधक विशेषज्ञ कर्नल संजय श्रीवास्तव ने बताया कि रविवार को लगभग 15 लाख तीर्थयात्री गंगासागर सागरद्वीप पहुंच चुके हैं तथा तीर्थयात्रियों का निरंतर आना जारी है. उम्मीद है कि इस वर्ष 30 लाख से अधिक तीर्थयात्री गंगासागर स्नान के लिए आएंगे गंगासागर के आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ (पश्चिम बंगाल) कर्नल संजय श्रीवास्तव ने कहा कि सीसीटीवी, ड्रोन व हीलियम बैलून से प्राप्त विजुअल का आपदा प्रबंधन की टीम विश्लेषण कर रही है उसके अनुरूप दिशानिर्देश जारी किये जा रहे हैं और गंगासागर आने वाले तीर्थयात्रियों की आवाजाही को नियंत्रित किया जा रहा है.

श्रीवास्तव ने बताया कि लॉट नंबर आठ से केचुबेड़िया जाने वाले वैसेल में पहली बार गार्मिनेट सेट तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है. यह तकनीक न केवल नेविगेशन में मदद कर रहा है, वरन जीपीएस व्यवस्था पर आधारित है. वेसल की स्थिति बताता है तथा पानी की गहराई कितनी है, इसकी भी जानकारी उपलब्ध कराता है. इससे वेसेल के फंसने की संभावना बहुत ही कम हो जाती है.

तकनीक के जरिए कोलकाता से गंगासागर तक निगरानी रख रही है सरकार : मंत्री

-गंगासागर तीर्थ यात्रियों की सुरक्षा समेत अन्य व्यवस्थाओं को देखने की जिम्मेदारी राज्य के बिजली मंत्री शोभन देव चटर्जी को दी गई है. उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने इस बार कोलकाता से लेकर गंगासागर तक अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया है और विशेष सीसीटीवी कैमरे तथा मेगा कंट्रोल रूम के जरिए तीर्थ यात्रियों की सुविधाओं पर निगरानी रखी जा रही है. इससे ना केवल पुण्यार्थियों को सुविधा हो रही है बल्कि प्रशासन को भी लोगों की सुविधाएं सुनिश्चित करने में मदद मिल रही है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की कोशिश है कि गंगासागर में स्नान के लिए आने वाले सभी लोगों को सुरक्षित रखकर पुण्य स्नान के बाद सुरक्षित रवाना किया जा सके. इसके लिए सारी व्यवस्था की गई है और सरकार की सारी एजेंसियां एक दूसरे से समन्वय बना कर काम कर रही है.

विशेष कंट्रोल रूम से पुण्यार्थियों पर नजर

-सागर मेला परिसर में चोरी-छिनताई-झपटमारी की कई घटनाएं हर साल बड़ी संख्या में प्रकाश में आती हैं लेकिन इस साल तीर्थ यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा का बेहद कड़े इंतजाम किया है. पूरे मेला परिसर में विशेष तौर पर अत्याधुनिक इंफ्रारेड कैमरे लगाए गए हैं जिनकी निगरानी के लिए वृहत्तर कंट्रोल रूम खोला गया है. यह कंट्रोल रूम आठ जनवरी से काम करना शुरू कर चुका है. सागर द्वीप में जगह-जगह 700 क्लोज सर्किट टीवी कैमरे लगाए गए हैं. आसमान से 20 ड्रोन निगरानी कर‌रहे हैं. उच्च क्षमता वाले कैमरे लगे 20 हीलियम बैलून भी 150 फुट की ऊंचाई से नजर रख रहे हैं.‌ यहां से मिलने वाले फुटेज के आधार पर प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीम काम कर रही है. सागर द्वीप में 30 अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, 89 डीएसपी रैंक के अधिकारी, 214 इंस्पेक्टर और 633 सब इंस्पेक्टर मुस्तैद हैं. इसके अलावा 2,000 होमगार्ड और 1,000 सिविल डिफेंस वोलेंटियर की भी तैनात हैं.

कुल मिलाकर 10,000 से अधिक सुरक्षाकर्मी मोर्चा संबाल रहे हैं. समुद्री मार्ग पर मैं भी और कोस्ट गार्ड के जवानों की मदद से स्पीड बोट से नजर रखी जा रही है. अग्निकांडों से निपटने के लिए 10 अस्थायी फायर सर्विस स्टेशन खोले गए हैं. हैम रेडियो स्टेशन भी खूले है. 10 बफर जोन भी स्थापित किए गए हैं. उसके अलावा पूरे मेला परिसर में लगने वाले पंडाल में एक विशेष अग्नि रोधी लेप लगाया जा रहा है ताकि आग लगने की की संभावना पूरी तरह से क्षीण रहे. सागर द्वीप की सड़कों पर वाहनों की गति नियंत्रित कर हादसों पर अंकुश लगाने के लिए सेंसर लगाए गए हैं. कल मिलाकर कहां जाए तो तीर्थ यात्रियों की सुरक्षााा के लिए राज्य सरकार ने पुख्ता व्यवस्था की है.

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