कई देशों के खिलाफ लड़ाई लड़ चुके जैतावत का निधन, सैन्य सम्मान के साथ दी अंतिम विदाई

पाली, 16 नवम्बर (उदयपुर किरण). कई देशों के विरुद्ध लड़ाईयां लडऩे वाले देश के गौरव 11 रिंग बटालियन के कैप्टन जोधसिंह जैतावत का शुक्रवार सवेरे जोधपुर के हॉस्पिटल में 98 वर्ष की उम्र में देहांत हो गया. उनका अंतिम संस्कार सांयकाल उनके पैतृक गांव पाली जिले के सोजत तहसील क्षेत्र अंर्तगत गुड़ा श्यामा गांव में सैन्य सम्मान के साथ किया गया. इस दौरान हजारों लोगों ने उन्हें नम आंखों से अंतिम विदाई दी. उन्हें अंतिम विदाई देने आर्मी के पठानकोट हैडक्वार्टर के आदेश पर नसीराबाद एवं जोधपुर से सूबेदार मेजर सुखदेव सिंह विश्नोई, सूबेदार नारायण सिंह, सूबेदार मेजर अभय सिंह एवं हवलदार नरपत सिंह गुड़ा श्यामा पहुंचे और सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया. इस दौरान अंतिम विदाई देने पहुंचे हजारों ग्रामीणों ने जय हिंद-जय कैप्टन जोधसिंह के नारे लगाए.

ब्रिटिश सेना में भर्ती हुए, पांच से अधिक देशों के विरुद्ध लड़ी लड़ाई

वे वर्ष 1942 में ब्रिटिश सेना की 8 राजरीफ में भर्ती हुए थे और अपने जीवन काल में द्वितीय विश्व युद्ध से लेकर भारत-पाक युद्ध, भारत-चीन युद्ध के अलावा जर्मनी, इटली, जापान के विरुद्ध पांच ऑपरेशन में हिस्सा लेकर सफलता अर्जित की थी. वर्ष 1966 में 8 राजरीफ, इन्फेंट्री, राजपूत बटालियन एवं टुकडिय़ों में से चयन कर एक नई 11 गार्ड इन्फेंट्री बनाई गई. जिसके वे प्रथम सूबेदार बनाए गए. कैप्टन जैतावत को 3 वर्ष पूर्व पंजाब में 11 गार्ड इन्फेंट्री की 50वीं वर्षगांठ पर वर्ष 2016 में सपरिवार आमंत्रित किया गया था. इन्हीं के नेतृत्व में सिल्वर जुबली मनाई गई. सेना में उनका नाम बड़े आदर से लिया जाता था. उन्हें क्षेत्र में एक वीर सेनानायक के रूप में देखा जाता था. कुछ समय पहले सीएम वसुंधरा राजे ने भी उन्हें मारवाड़ श्री के अलंकार से नवाजा था.

सेवानिवृत्ति के बाद रहे तीन बार सरपंच

जैतावत सेवानिवृत्ति के बाद तीन बार गुड़ा कलां (सोजत) सरपंच रहे. वे सोजत परगना के राजपूत समाज के लंबे समय तक अध्यक्ष भी रहे. पाबूजी मंदिर ट्रस्ट एवं दूदेश्वर महादेव मंदिर एवं अन्य कई कई क्षेत्रों में पदाधिकारी रहे है. उनके चार पुत्री एवं एक पुत्र अजयपाल सिंह है.

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