घनी बादियों एवं ऊंचे पहाड़ पर देखने को मिलते है अद्भुत चमत्कार

दतिया, 09 नवम्बर (उदयपुर किरण). विध्यांचल पर्वत की घनी बादियों एवं ऊंचे पहाड़ पर स्थित रतनगढ़ माता मंदिर पर प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी दीपावली की दौज पर लगने वाले रतनगढ़ माता मेले में लाखों श्रद्धालू पहुंचे. गत वर्ष की तुलना में यहाँ और अधिक श्रद्धालु आये चप्पे-चप्‍पे पर मौजूद पुलिस एवं पर्किंग प्वाइंटो से जूझते वाहन चालक पहली बार यातायात को लेकर गंभीरता का प्रमाण बने. जानकारी के अनुसार जिला प्रशासन द्वारा एक माह की मशक्त के बाद की गई. चौकस व्यवस्थाओं के बीच लाखों श्रृद्धालुओं ने माता रतनगढ़ और कुंअर बाबा के दर्शन किए. जिलाधीश वीरेन्द्र सिह रावत तथा पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी मेले में ही कैंप किए रहे जिला व पुलिस प्रशासन का अमला चौकस ड्यूटी पर तैनात रहा.

सबने देखे अद्भुत चमत्कार….

विज्ञान के हदें समाप्त करते कई चमत्कार लोगों ने देखे लेकिन माँ रतनगढ़ृ के दरवार में अदभुद नजारा देखने को मिलता है. जहाँ महिलाएं पुरूष सर्पदंश से पीडि़त जैसे ही नदी में पैर रखते है वैसे ही बेहोस हो जाते है और उनके परिजन कंधे पर रखकर या प्रशासन द्वारा कराई गई स्टे्रचर व्यवस्था पर लिटाकर जैसे ही कुअर बाबा के दरवार में पहुंचते है वैसे ही पीडि़त होश में आ जाता है. वहीं सैकड़ों ऐसे लोग भी रहे जिनके पशुओं को भी बंध लगा था और वह पशुओं के बांधने वाले पस्से को लेकर मंदिर पहुंचे. जिससें नदी पर स्वत: गठान लगी और परिक्रमा के बाद वह खुद ही खुल गई.

16 डीएसपी, 8 सौ अधिकारी 120 होमगार्ड सैनिक तैनात ….

रतनगढ़ स्थित माता मंदिर पर विशाल मेले की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे. मेले में दो हजार से अधिक पुलिस के अधिकारी, कर्मचारी तैनात किए वहीं जिले के विभिन्न विभागों से सैकड़ों की संख्या में अधिकारी, कर्मचारी तैनात किए गए. प्रमुख बात यह रही कि किसी तरह की अनहोनी न हो सके इसके लिए सिंध नदी में 60 गोताखोर तैनात रहे. ग्वालियर से 7 अश्वारोही दल के सदस्य मय घोड़े के तैनात रहे. यह उन स्थानों की निगरानी बनाए थे जहाँ वाहन नहीं पहुँच सकते थे. यहाँ तक कि मेला प्रभारी सुरक्षा डीआईजी सुधीर व्ही लार्ड, जिलाधीश वीरेन्द्र सिंह रावत, पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मंजीत सिंह चावला मेला खत्म होने तक कैम्पों में रहे.

पुलिस प्रशासन ने व्यवस्था बनाए रखने के लिए सीईओ जिला पंचायत डॉ.आशीष भार्गव को मेला प्रभारी बनाया गया था. सुरक्षा व्यवस्था में पुलिस की ओर से एसपी, एएसपी, 16 डीएसपी समेत जिला बल से 8 सौ अधिकारी, कर्मचारी तैनात रहे जबकि 120 होमगार्ड सैनिक, 60 गोताखोर कर्मी तैनात रहे.

नदी में हुए स्नान…
चप्पे-चप्पे पर पुलिस की तैनाती के बाबजूद लोग पुल के नीचे नदी पर नहाने के लिए उतरे नदी के किनारे सीडिय़ों से चल कर वड़ी संख्या में लोग मंदिर तक गए. हालांकि पुलिस द्वारा मोटरबोट डाली गई थी. जिसका उद्धेश्य किसी भी प्रकार की समस्या से निपटना था. नदी के आस-पास देर रात तक भीड़ जमा रही.

पेढ़ भर कर आए लोग….
दुर्गम रास्ते पर जहाँ लोगों का पैदल चलना भी दूभर हो रहा था. वहाँ हजारों लोग जमीन पर लेटते हुए यानि पेढ भरते हुए मंदिर तक पहुंचे. इसके अलावा मुंह में सांग पिरोए कई लोग एवं जबारों के साथ मंदिर पहुंचे.

लोग ले गये मंदिर की लकड़ी….

ऐसी मान्यता है कि यहाँ की लकड़ घर पर रखने मात्र से सर्प सहित किसी भी जहरीली जीव का घर में प्रवेश नहीं रहता इसी मान्यता के चलते हजारों लोग मंदिर की लकड़ी घर ले गये.

स्‍ट्रेचरों की व्यवस्था रही सराहनीय….

अब तक सर्पदंश पीडि़त व्यक्ति को जैसे ही मैहर आता था तो उसके परिजन कंधे के सहारे लेटाकर उसे मंदिर तक ले जाते थे. यहाँ माता एवं कुंआर बाबा के नाम झाड़ लगाते ही व्यक्ति स्वस्थ्य हो जाता है, परन्तु प्रशासन द्वारा स्टे्रचर की व्यवस्था की थी. इसके तहत जैसे ही कोई महर का रोगी जमीन पर गिरता है. वैसे ही उसे स्टे्रचर उपलब्ध कराकर उसके परिजनो के साथ माता के मंदिर तक पहुंचा देते है. इस व्यवस्था ने लोगों को राहत की सांस लेने का मौका दिया. रतनगढ़ माता मंदिर पर सुरक्षा की दृष्टि से पर्याप्त बल लगाया था, सिंध नदी पर गोताखोर, पुलिस बल व प्रशासनिक अधिकारियों ने मोर्चा संभाले रखा. मेला शांतिपूर्ण सम्पन्न हुआ.

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