हाथी से बचने के लिए बकरी के गले में घंटी

कोलकाता, 09 नवंबर (उदयपुर किरण). बिल्ली के गले में घंटी बांधने की कहावत तो आपने सुनी होगी लेकिन पश्चिम बंगाल के जंगली इलाके में लोगों ने हाथियों से बचने के लिए बकरी के गले में घंटी बांध दी है. दरअसल पश्चिम बंगाल के जंगलमहल और मेदिनीपुर के जंगलों में बड़ी संख्या में हाथी रहते हैं. कभी-कभार हाथियों का दल जंगल छोड़कर जन बहुल इलाके में घुस जाता है और घरों को तोड़ने के साथ-साथ लोगों की भी जान ले लेता है. इससे बचने के लिए गांव वालों ने अभिनव रास्ता अपनाया है.

जंगल में चराने के लिए ले जाए जाने वाली बकरियों के गले में घंटी बांधी गई है. यह घंटी भी किसी कंपनी में नहीं बनी है बल्कि घर पर ही बनाई गई है. स्टील के गिलास में पीछे की ओर से छेद कर उसमें लोहा अथवा किसी और ठोस चीज को झुलाया गया है जो वजन में भी हल्का है और आवाज भी काफी होती हैं. गांव वालों का कहना है कि हाथी देखते ही बकरियां भागने लगती हैं इसीलिए इन के गले में घंटी बांधी गई है ताकि अगर हाथियों का दल जन बहुल इलाकों की ओर बढ़े तो जंगल में चरने के लिए छोड़ी गई बकरियां भागने लगेंगी और घंटी की आवाज सुनकर आसपास के लोग सतर्क हो जाएंगे जिससे जान-माल के नुकसान को टाला जा सकता है.

इसके अलावा कई बार ऐसा होता है कि जंगल में बकरियों का झुंड चरते-चरते खो जाता है. गले में घंटी रहने की वजह से इस समस्या से निजात मिलेगी. जंगल में बकरी चराने पहुंची ललिता महतो से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि सबसे पहले तो इसका मकसद हाथियों के हमले से पहले ही सतर्क होना है और दूसरा बकरियां अगर खो जाएं तो काफी जल्दी इन्हें खोज लिया जाएगा.

मेदनीपुर ग्रामीण ग्राम पंचायत के उपप्रधान अंजन बेरा ने बताया कि पहले गाय के गले में घंटा बांधा जाता था, अब बकरी के गले में भी घंटी बांधना शुरू किया गया है. उन्होंने बताया कि आए दिन रोज हाथियों के हमले हो रहे हैं लेकिन गाय और बकरी चराना तो बंद नहीं किया जा सकता है. इसलिए घरेलू तरीके से इसके लिए सतर्कतामूलक कदम उठाया गया है.

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