जब देश में थी दीवाली, वह बांट रही थी जिंदगी : देवोलीना के अंगों से तीन लोगों को नई जिंदगी

कोलकाता, 08 नवंबर (उदयपुर किरण). एक ओर जब पूरा देश दिवाली पर आतिशबाजी में जुटा था वहीं दूसरी ओर मौन और निश्वास होकर देवोलीना खुद तो दम तोड़ रही थी लेकिन जाते-जाते तीन लोगों को जिंदगी दे गई हैं. दीपावली की रात सोनारपुर दक्षिणपाड़ा की रहने वाली 25 साल कीदेवोलीना घोष को जब ढाकुरिया आमरी अस्पताल में चिकित्सकों ने ब्रेन डेड घोषित कर दिया तो उसके पिता तरुण घोष और मां कृष्णा देवी ने बिना देरी किए बेटी के अंगों को दान करने का निर्णय लिया. यह लोग चाहते थे कि इनकी बेटी मरकर भी दूसरों में जिंदा रहे. देवोलीना इनकी इकलौती बेटी थी और वह भी बचपन से ही मानसिक रूप से बीमार थी. मां बाप ने उसे स्पेशल चाइल्ड के रूप में ही पाल-पोसकर बड़ा किया था. पिछले सप्ताह सिर में लगातार दर्द के बाद उसे आमरी अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां बुधवार रात चिकित्सकों ने उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया.

बिना देरी किए मां बाप ने उसकी दोनों आंखें, दोनों किडनी, लिवर और हृदय दान करने का निर्णय लिया. इसकी प्रक्रिया भी तेज कर दी गई और दीपावली की भारी भीड़ के बावजूद कोलकाता पुलिस ने आमरी अस्पताल से एसएसकेएम तक ग्रीन कॉरिडोर बना दिया. यहां से देवलीना की दोनों आंखें, लीवर और दोनों किडनी को एसएसकेएम अस्पताल पहुंचाया गया जबकि हृदय को ईएम बाईपास के पास एक गैर सरकारी अस्पताल में ले जाया गया. यहां एक किडनी हुगली की धनियाखली में रहने वाली अनीता घोष के शरीर में प्रतिस्थापित किया गया है जबकि दूसरी किडनी हुगली के ही पांडुआ निवासी तृतीय वर्ष की छात्रा केया दे के शरीर में प्रतिस्थापित किया गया है. इसके अलावा देवोलीना का हृदय बाईपास के पास एक गैर सरकारी अस्पताल में इलाजरत बहरमपुर की तानिया पंडित के शरीर में प्रतिस्थापित कर दिया गया है.

लिवर की जांच करने पर पता चला कि वह प्रतिस्थापन लायक नहीं था. दोनों आंखों को अस्पताल में संरक्षित कर दिया गया है जो जरूरतमंद को दिया जाएगा. गुरुवार को एसएसकेएम अस्पताल और ईएम बाईपास के उक्त गैर सरकारी अस्पताल की ओर से बताया गया है कि रात भर जागकर चिकित्सकों ने ऑपरेशन किया और गुरुवार सुबह तक इन अंगों को सफलतापूर्वक प्रतिस्थापित कर दिया है. जिन रोगियों के शरीर में इन्हें लगाया गया है उन्हें 24 घंटे के लिए निगरानी पर रखा गया है. इनकी हालत स्थिर है और सुधार भी हो रही है. कुल मिलाकर कहा जाए तो देवोलीना ने दीपावली की रात भले ही दम तोड़ दिया लेकिन जाते-जाते तीन लोगों को जिंदगी दे गई हैं. अभी उसकी दोनों आंखें बची है जो कम से कम दो लोगों की जिंदगी में रोशनी लाएंगी.

उल्लेखनीय है कि मरने के बाद भी दूसरों को जिंदगी देने के पुण्य कार्य के रूप में अंगदान के प्रति हाल के दिनों में कोलकाता वासियों का रुझान काफी तेजी से बढ़ा है. इस कड़ी में एक और नया कीर्तिमान दीपावली की रात जुड़ गया है. इसे अधिक से अधिक बढ़ावा देने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार ने भी शिक्षा सत्र 2019 में आठवीं श्रेणी के बच्चों को अंग दान के बारे में विस्तार से पढ़ाने का निर्णय लिया है. इसके लिए किताबों की छपाई का काम भी पूरा हो चुका है.

देवोलीना के परिजनों में से एक प्रदीप दत्ता ने गुरुवार की रात “हिन्दुस्थान समाचार” से विशेष बातचीत में बताया कि लड़की मानसिक रूप से‌ स्वस्थ्य नहीं थी और स्पेशल चाइल्ड के रूप में ही बड़ी हुई थी. जब चिकित्सकों ने साफ कर दिया था कि बचने की उम्मीद नहीं है तो मां-बाप ने चाहा था कि वह दूसरे लोगों में जीवित रहे. इसके लिए उसके उसकी दोनों आंखें, हृदय, लीवर और दोनों किडनी दान किया गया है. इससे कम से कम 6 लोगों को दूसरी जिंदगी मिल सकती थी लेकिन लीवर को प्रतिस्थापन योग्य नहीं पाया गया है. इसके बावजूद तीन को नई जिंदगी मिल चुकी हैं और दोनों आंखें भी दो लोगों की जिंदगी में नई रोशनी लाएंगी, ऐसी हम लोगों को उम्मीदें हैं. उन सभी लोगों से परिवार का संपर्क हमेशा बना रहेगा.”

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