
शिमला, 31 अक्टूबर . Enforcement Directorate (ईडी) ने कोरवियो कॉइन (केआरओ) से जुड़े 500 करोड़ रुपए के क्रिप्टो घोटाले के सिलसिले में चंडीगढ़, मोहाली और जीरकपुर के विभिन्न स्थानों पर छापेमारी की. एक अधिकारी ने Saturday को बताया कि इस दौरान संपत्ति संबंधी दस्तावेज और 72 लाख रुपए जब्त किए गए हैं.
अधिकारी ने कहा कि ईडी के शिमला उप क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा 28 अक्टूबर को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 17(1) के तहत तलाशी अभियान चलाया गया.
इस दौरान, संपत्ति संबंधी दस्तावेजों सहित विभिन्न आपत्तिजनक दस्तावेज, कई डिजिटल उपकरण और बैंक खातों से संबंधित रिकॉर्ड और 72 लाख रुपए जब्त किए गए.
जांच से पता चला है कि इस क्रिप्टोकरेंसी फ्रॉड के मास्टरमाइंड सुभाष शर्मा का करीबी सहयोगी अतुल सूद, सुभाष शर्मा से मिलने Dubai गया था. वह सुभाष शर्मा के लिए कॉन्फ्रेंस और अन्य कार्यक्रम आयोजित करने में शामिल था.
ईडी ने बताया कि इस फ्रॉड के मामले में First Information Report दर्ज होने के बाद भी ये गतिविधियां जारी थीं. जांच एजेंसी के तलाशी अभियान के दौरान अतुल सूद को गिरफ्तार कर 29 अक्टूबर को शिमला की विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया गया, जिसने उन्हें 5 नवंबर तक हिरासत में रखा.
इससे पहले, ईडी ने 13 दिसंबर, 2025 और 15 जून, 2026 को फर्जी क्रिप्टोकरेंसी स्कीम से जुड़े विभिन्न व्यक्तियों के ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया था, जिसके परिणामस्वरूप आपत्तिजनक दस्तावेजों और डिजिटल उपकरणों के साथ-साथ 1.5 करोड़ रुपए की चल संपत्ति जब्त की गई थी.
इस मामले में सुभाष शर्मा के कई सहयोगियों, हेम राज, सुखदेव ठाकुर, अभिषेक शर्मा, मिलन गर्ग और मासूम जुनेजा को गिरफ्तार किया गया था. ईडी ने बताया कि उनके खिलाफ आरोप पत्र और पूरक आरोप पत्र शिमला की विशेष अदालत में दायर कर दिए गए हैं. Himachal Pradesh और पंजाब Police द्वारा सुभाष शर्मा और अन्य के खिलाफ दर्ज First Information Report के आधार पर ईडी ने जांच शुरू की.
ईडी ने बताया, “जांच में पता चला कि सुभाष शर्मा ने अपने साथियों हेम राज, सुखदेव ठाकुर, अभिषेक शर्मा और अन्य के साथ मिलकर एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से क्रिप्टोकरेंसी आधारित मल्टी-लेवल मार्केटिंग (एमएलएम) योजना चलाई, जिसमें निवेशकों को उच्च रिटर्न का आश्वासन देकर कोरवियो कॉइन (केआरओ) में निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया.”
यह योजना पोंजी मॉडल पर आधारित थी, जिसमें नए निवेशकों से प्राप्त धनराशि का उपयोग पुराने निवेशकों को भुगतान करने के लिए किया जाता था.
बरामद डिजिटल डाटा से पता चला कि 24 लाख से अधिक उपयोगकर्ता इस धोखाधड़ी से प्रभावित हुए, जिसमें 219 मिलियन डॉलर से अधिक के लेनदेन शामिल थे र निवेशकों को लगभग 500 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ.
ईडी ने कहा, “जांच में पता चला है कि नए निवेशकों से जुटाई गई धनराशि का अधिकांश हिस्सा नकद में प्राप्त हुआ और संबंधित टीमों के नेताओं को दिया गया, जहां से इसे अंततः सुभाष शर्मा और उनके सहयोगियों विजय कुमार जुनेजा और मासूम जुनेजा तक पहुंचाया गया.”
ईडी ने कहा, “यह भी पता चला है कि निवेशकों से जुटाई गई धनराशि का एक हिस्सा अचल संपत्तियों के अधिग्रहण में इस्तेमाल किया गया, जिसमें काफी बड़ी रकम नगद में दी गई और पंजीकृत मूल्य वास्तविक मूल्य से काफी कम थे.”
बयान में कहा गया है कि नए निवेशकों से प्राप्त धनराशि का एक छोटा हिस्सा कई बैंक खातों, फर्जी फर्मों और बिचौलियों के माध्यम से भेजा गया और इसके स्रोत और आवागमन को छिपाने के लिए आंशिक रूप से क्रिप्टोकरेंसी में परिवर्तित किया गया.
फर्जी क्रिप्टोकरेंसी घोटाले के मास्टरमाइंड सुभाष शर्मा हजारों निवेशकों को ठगने के बाद Dubai भाग गए, जिससे निवेशकों को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा. ईडी ने इस मामले में सक्षम अधिकारियों के समक्ष उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही शुरू कर दी है.
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एएसएच/
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