मोहर्रम पर विशेष : 9वीं तारीख को रात को डेढ़ बजे उदयपुर में होता है छड़ी मिलन

उदयपुर, 19 सितम्बर (उदयपुर किरण). मुस्लिम समुदाय के मोहर्रम के महीने में जगह-जगह छड़ियों का जुलूस निकलता है, ताजिये निकलते हैं, लेकिन झीलों के शहर उदयपुर में ऐसी परम्परा है जो दुनिया में कहीं नहीं होती. यहां मुस्लिम समुदाय के एक हिस्से नायक समुदाय की छड़ी, मुस्लिम समुदाय के दूसरे हिस्से मेवाफरोशान की छड़ी से मिलन करती है यानी दोनों छड़ियों को आपस में स्पर्श कराया जाता है. इसके बाद नायक समुदाय की छड़ी मेवाफरोशान समुदाय के ताजिये से भी मिलन करती है जिसे ‘सलामी’ भी कहा जाने लगा है. इसे बरसों से उदयपुर के भीतरी शहर में मोचीवाड़ा-सर्राफा बाजार के बीच स्थित कमल गली के नुक्कड़ पर इस परम्परा का निर्वहन हो रहा है. इस बार यह कार्यक्रम 20 सितम्बर यानी गुरुवार रात को होगा.

मेवाफरोश कौम के अध्यक्ष बुजुर्ग रहीम बख्श पटेल बताते हैं कि यह परम्परा मेवाड़ के पूर्व महाराणा स्वरूप सिंह के समय शुरू हुई. वे बताते हैं कि मुस्लिम समुदाय के एक उपसमुदाय के लोग महाराणा के छड़ीदार थे और एक अन्य उपसमुदाय के लोगों से उनकी बहसबाजी होती रहती थी. महाराणा ने इन दोनों उपसमुदायों को एक करने के लिए मोहर्रम की 9वीं तारीख मुकर्रर की और दोनों की छड़ियों का मिलन कराया. इसका संदेश साफ़ था कि मुस्लिम समुदाय के ये दोनों उपसमुदाय मिलजुल कर रहें. इसके बाद से यह परम्परा मेवाड़ यानी उदयपुर में कायम है.

नौजवान मेवाफरोशान इन्तेजामिया सोसायटी के सचिव मोहम्मद छोटू कुरैशी ने बताया कि कई सालों से चलती आ रही परंपराओं को आगे बढ़ाते हुए इस बार भी मोहर्रम की 9वीं तारीख को छड़ी मिलन का कार्यक्रम 20 सितम्बर गुरुवार को पूर्व निर्धारित समय के अनुसार भड़भूजा घाटी स्थित कमल गली के बाहर देर रात्रि को होगा. मेवाफरोश कौम के अध्यक्ष रहीम बख्श पटेल ने बताया कि नायकों की छड़ी व मेवाफरोश बिरादरी की छड़ी का मिलन देर रात करीब एक बजे होगा और मेवाफरोश कौम के मोहर्रम (ताजिया) व नायकों की छड़ी का मिलन ‘सलामी’ देर रात 1.30 बजे होगी.

मेवाफरोश कौम के नजर मोहम्मद बताते हैं कि इस प्रोग्राम को देखने के लिये मुस्लिम के अलावा आस्था रखने वाले हिन्दू भाई भी अपनी मन्नतों के लिये देर रात तक इस प्रोग्राम को देखने के लिए जागते रहते हैं. कुरैशी ने बताया कि इस प्रोग्राम को देखने के लिए उदयपुर संभाग एवं कई अन्य जगहों से भी काफी तादाद में बुजुर्ग, युवा, महिलाएं भी आती हैं.

इस प्रोग्राम को सफल बनाने के लिए पूरी मेवाफरोश कौम, हाजी अब्दुल बाकीबा कुरैशी खानदान के परिवार, बुजुर्ग, युवा पूर्ण रूप से जुटते हैं.
मोहर्रम की सलामी के बाद मोहर्रम (ताजिया) को पुन: मोचीवाड़ा, सिन्धी बाजार, अंजुमन चौक, मेवाफरोश मोहल्ला होकर चौखला बाजार में लाया जाता है और वहां स्थित मेवाफरोशान मस्जिद में रखा जाता है. इसके बाद मोहर्रम के आगे खड़ी चौकी भी भरी जाती है. चौखला बाजार से अपने स्थान पर पहुंचने से पूर्व मन्नत मांगने वाले नारियल भी चढ़ाते हैं.

Report By Udaipur Kiran

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