संघ चाहता है ‘भाजपा-शिवसेना’ साथ रहे

नागपुर, 16 सितम्बर (उदयपुर किरण). महाराष्ट्र की राजनीति का हिंदूवादी चेहरा रही शिवसेना ने एनडीए से अलग होकर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है. इससे पहले 2014 में शिवसेना विधानसभा का चुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ चुकी है लेकिन भाजपा का पैतृक संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ चाहता है कि, दोनों पार्टियां साथ रहें. सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत ने केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से भाजपा-शिवसेना गठबंधन को लेकर बात की है, जिसके चलते आने वाले दिनों में यह पुराना गठजोड़ फिर से साथ दिखाई दे सकता है.

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस दोनों नागपुर के निवासी हैं लेकिन दशहरे का त्योहार छोड़कर यह दोनों कभी संघ मुख्यालय नहीं जाते. बीते सप्ताह 11 सितम्बर को गडकरी और 15 सितम्बर को फडणवीस अचानक संघ मुख्यालय जा पहुंचे. दोनों नेताओ ने संघ प्रमुख डॉ. भागवत से लंबी मुलाकात की. इस मुलाकात का अधिकारिक ब्योरा तो सामने नहीं आया है लेकिन संघ के विश्वसनीय सूत्रों ने बताया कि, भाजपा-शिवसेना का गठबंधन बरकरार रहे कुछ ऐसा ही चाहती है संघ. इसके लिए सरसंघचालक ने गडकरी और फडणवीस से अलग-अलग चर्चा की. सूत्रों के अनुसार बीते कुछ दिनों से विपक्षी दल सरकार के खिलाफ लामबंद हो रहे हैं जिसका प्रभाव कर्नाटक के चुनाव में दिखाई दिया. अगर विरोध का यही क्रम जारी रहा तो आगामी चुनाओं में बीजेपी के अलग-थलग पड़ने की संभावना है. इसलिए पार्टी के पुराने मित्रों का साथ बरकरार रहे ऐसा संघ चाहती है.

स्वामी विवेकानंद के शिकागो के भाषण के 125 साल पूरे होने के मौके पर 07 से 09 सितम्बर के मध्य अमेरिका में विश्व हिंदी सम्मेलन का आयोजन किया गया था. इस सम्मेलन में डॉ. भागवत ने कहा था कि शेर यदी अकेला हो तो जंगली कुत्ते भी उसे पछाड़ देते हैं. इस बयान को लेकर राजनीतिक गलियारों में बयानबाजी भी हुई थी, लेकिन सरसंघचालक ने विपक्षी दलों को कुत्ता नहीं कहा था, बल्कि वह इस उदाहरण के माध्यम से यह बताना चाहते थे कि, अकेला होने पर शेर भी हार जाता है.

भारत लौटने के बाद 11 सितम्बर को भागवत ने केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात की. साथ ही 15 सितम्बर को वह महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से भी मिले. यह मुलाकात गठबंधन की ओर पहला कदम माना जा रहा है. शिवसेना ने भले ही अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी हो, लेकिन संघ की पहल के बाद आगामी चुनाव से पहले गठबंधन को लेकर दोनों पार्टियों में चर्चाएं होने कि संभावना तेज हो गई है.
शिवसेना प्रमुख बालासाहब ठाकरे के निधन के बाद उद्धव ठाकरे ने शिवसेना की कमान संभाली है. साथ ही शिवसेना के रिश्ते बीजेपी से कितने भी कटू हों, लेकिन संघ को लेकर उन्होंने कभी कोई आपत्तिजनक बयान नहीं दिए हैं. इतना ही नहीं 04 दिसम्बर 2016 को नागपुर में गडकरी की बेटी के विवाह में शिरकत करने पहुंचे ठाकरे ने शादी में जाने से पहले संघ मुख्यालय पहुंचकर डॉ. भागवत से लंबी मुलाकात भी की थी. इसके बाद वह काफी सकारात्मक और आश्वास्त भी दिखाई दे रहे थे.

Report By Udaipur Kiran

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