अगड़ों की नाराजगी दूर करने के लिए संघ ने संभाली कमान

नई दिल्ली, 16 सितम्बर (उदयपुर किरण). अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम के मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को पलटते हुए मोदी सरकार द्वारा किसी के विरुद्ध दलित एक्ट में प्राथमिकी दर्ज कराने मात्र से गिरफ्तारी करने वाला बिल पास करके नियम बनवा देने, और उसके दुरुपयोग के कारण परेशान सवर्णों व अन्य पिछड़े वर्ग के लोगों ने जब कई राज्यों में धरना-प्रदर्शन, घेराव किया है, तो भाजपा को चिंता हुई है. चिंता तब और बढ़ गई जब सरकार द्वारा नौकरियों में, प्रोन्नत में आरक्षण लागू करने, विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों में अध्यापकों, कर्मचारियों की नियुक्ति में विभाग स्तर पर 04 जगह खाली हों तो भी आरक्षण का नियम लागू करने की पहल करने का भी विरोध होने लगा.

नाराज छात्र व अध्यापक, इसके साथ ही दलित एक्ट के विरोध में भी हो गए. इससे आशंकित भाजपा के रणनीतिकार मंच पर या सभा में भले हुंकार भर रहे हैं कि सवर्ण भाजपा को छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे, लेकिन अंदर-अंदर डरे हुए हैं. भय हो गया है कि दलित पूरी तरह भाजपा को वोट नहीं देंगे और जितना उनका वोट मिलेगा, उससे अधिक सवर्ण व ओबीसी नाराज होकर घर बैठ जाएंगे, तो पार्टी को मिलने वाला वोट बहुत कम हो जाएगा. अब चूंकि जिस भाजपा की केन्द्र सरकार व उसके नेताओं ने इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को पलटा है, वे जब सवर्णों से कुछ कह रहे हैं तो उससे सवर्ण और चिढ़ रहे हैं.

सूत्रों का कहना है कि इसकी काट के लिए संघ आगे आया है. उसके तमाम संगठनों में से एक “भारतीय किसान संघ” ने गांवों में किसानों के बीच जाकर जनता, विशेषकर सवर्णों, पिछड़ी जातियों व अन्य पिछड़ी जातियों को समझाना शुरू किया है, बताना शुरू किया है कि भाजपा सरकार ने किसानों के लिए क्या- क्या काम किया है, कितना कर रही है. समाज का दबा तबका उठेगा तभी समाज का उत्थान होगा. संघ के अन्य कई आनुषांगिक संगठन भी इसी तरह का उपक्रम शुरू कर दिए हैं. जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं उनमें यह बड़े और सघन स्तर पर किया जा रहा है. इसके लिए राजस्थान, म.प्र.,छत्तीसगढ़ में ब्लॉक स्तर पर गोष्ठी, बैठकें शुरू हो गई हैं.

लेकिन मुश्किल यह है कि कई गावों, कस्बों, शहरों के लोग व कई बुजुर्ग जो विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार के समय आरक्षण लागू किये जाने के विरोध में धरना प्रदर्शन किये थे, वे अब अपने परिचित भारतीय किसान संघ व अन्य संगठनों के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं से पूछने लगते हैं कि तब आप लोगों ने, भाजपा ने आरक्षण का क्यों विरोध किया था, अब आपकी सरकार है तो क्यों इसकी तरफदारी कर रहे हैं. इसी हालात व आगामी चुनावों के मद्दे नजर संघ के कई आनुषांगिक संगठनों ने सक्रिय हो भाजपा से जनता की नाराजगी दूर करने के लिए अपना अभियान तेज कर दिया है. इस बारे में संघ के एक वरिष्ठ कार्यकर्ता ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा है कि परेशानी तो हो रही है. इसके लिए कुछ उपाय नहीं किया गया तो यह और बढ़ेगी.

इस मुद्दे पर पूर्व मंत्री सुरेन्द्र का कहना है कि सरकार गरीबों, दलितों को पढ़ने, रहने के लिए जितना हो सके सुविधाएं दे, उससे कौन रोक रहा है. लेकिन जिस तरह से वोट के लिए किया जा रहा है, उससे तो समाज ही बंट रहा है. इससे जाति युद्ध की संभावना बनने लगी है. इसलिए इस पर गंभीरता से विचार करके ऐसा कुछ किया जाना चाहिए जिससे दलितों, पिछड़ों का विकास भी हो, और समाज में, जातियों में आपस में द्वेष भी नहीं हो.

Report By Udaipur Kiran

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