अभियंता दिवस समारोह का आयोजन, सेनिटेशन के क्षेत्र में डिजिटल क्रांति की जरुरत सर्वाधिक

उदयपुर. देश ने  डिजिटल क्रांति को स्वीकार किया है  .   डिजिटल तकनिकी उद्योगों के  विकास , संतुलित शहरीकरण, खाद्यान्न उत्पादन, स्वास्थ्य सुधार के साथ साथ पर्यावरणीय स्वच्छता के लिए सर्वाधिक जरुरी है  . यह विचार शनिवार को अभियंता दिवस के अवसर पर विद्या भवन पॉलिटेक्निक में आयोजित समारोह में व्यक्त किये गए  .

कार्यक्रम का आयोजन इंस्टीटयूशन ऑफ़ इंजीनियर्स व् आई एस टी इ के स्टूडेंट चेप्टर्स, पॉलिटेक्निक पूर्व विद्यार्थी संस्था एवं डॉ मोहन सिंह मेहता मेमोरियल ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में किया गया. कार्यक्रम में देश में बढ़ते कचरे, गंदगी व् प्रदूषण पर चिंता व्यक्त करते हुए समारोह में उदयपुर में स्वच्छता  को सुनिश्चित करने वाली पहल से जुड़ने का संकल्प लिया गया  . उदयपुर में हो रहे सेफ सेनिटेशन प्रयासों की जानकारी रखी गई  . मुख्य वक्ता मोहन सिंह मेहता मेमोरियल ट्रस्ट के अध्यक्ष मानव सिंह ने उदयपुर में कचरे व् गंदगी की समस्या के निराकरण के लिए स्वैच्छिक आधार पर कार्य करने का आह्वान किया  . मानव सिंह ने कहा कि उदयपुर विश्व के सर्वाधिक प्रदूषित सौ शहरों में शामिल है  . सरल तकनिकी, डिजिटल प्रक्रियाओ व् साधनों के माध्यम से हम शहर को सुन्दर व् स्वच्छ बना सकते हैं  .

प्राचार्य डॉ अनिल मेहता ने कहा कि स्वच्छ,सुरक्षित व् समग्र सेनिटेशन पर विद्या भवन एवं सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च, नई दिल्ली वर्ष  2014से लगातार कार्य कर रहे हैं इसके तहत उदयपुर में सेनिटेशन पर जी आई एस मैपिंग की गई. सेप्टिक टैंक का तकनीकी अध्ययन किया तथा एक सही सेप्टिक टैंक बनाने का मैन्युअल बनाया ताकि मल का समुचित उपचार हो .  जिसे नगर निगम ने लागू किया. मेहता ने कहा कि  उदयपुर में विगत वर्ष सेप्टिक टैंक में गिरकर चार लोग मर गए ,अतः सेप्टिक टैंकसीवर लाइन को साफ व मेंटेन करने वाले लोगो को सुरक्षा व सावधानियों के प्रति प्रशिक्षित करना जरुरी है इसके तहत  आगामी 24 सितम्बर को ऐसे सफाई साथियों की पहली कार्यशाला होगी .

मेहता ने कहा कि डिजिटल सहित अन्य उपयुक्त तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए उदयपुर में फिकल स्लज प्रबंधन पर विद्या भवन, नगर निगम, हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड तथा सेंटर फॉर पालिसी रिसर्च मिलकर कार्य कर रहे हैं .  सेप्टिक टैंक से निकलने वाले मलबे (फ़ीकल स्लज) के उपचार के लिए उदयपुर में शीघ्र ही फ़ीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट (एफ एस टी पी) स्थापित  होगा. हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड यह प्लांट स्थपित करेगा. सरकार की फ़ीकल स्लज मैनेजमेन्ट पॉलिसी के अनुरूप समग्र  फ़ीकल स्लज मैनेजमेंट प्लान भी  उदयपुर में लागू किया जाएगा. मेहता ने कहा कि इस संबंध नगर निगम, हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड, सी पी आर नई दिल्ली तथा विद्या भवन के मध्य एम ओ यू किया गया है. स्थानीय निकाय, इंडस्ट्री, रिसर्च तथा एकेडेमिक इंस्टीट्यूशन की सहभागिता में हो रही यह पहल पूरे देश के  लिए एक अनुकरणीय उदाहरण सिद्घ होगा.

युवा पर्यावरणविद अनूप सिंह ने कहा कि नीतियों, तकनीकों, स्वैछिकता के समुच्चय से स्वच्छता व् सेनिटेशन कि समस्या का निराकरण किया जा सकता है. कार्यक्रम में स्वच्छता के लिए डिजिटल तकनीकियाँ विषय पर शिवा सोनी, मेघान्शी असावरा, दीक्षा सोनी ने विचार रखे  .  कृतिका गोस्वामी, मोनाल कुमावत, जय सुथार सहित छत्तीस प्रतिभागियों ने स्वच्छता सुनिश्चित करने पर पोस्टर प्रदर्शित किये  . प्रारम्भ में भुवन आमेटा ने सभी का स्वागत किया  . जयप्रकाश श्रीमाली ने धन्यवाद दिया  . सञ्चालन कृति व् मोनाल ने किया  .

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