स्वच्छता ही सेवा मुहिम : मोदी की हस्तियों से बात

नई दिल्‍ली . पीएम नरेंद्र मोदी ने शनिवार को स्वच्छता ही सेवा मुहिम के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हमने 4 साल में जो लक्ष्य हासिल किया है, वह बीते 60 से 70 सालों में नहीं किया जा सका. इस दौरान पीएम मोदी ने आम लोगों के साथ ही ऐक्टर अमिताभ बच्चन और उद्योगपति रतन टाटा से भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बातचीत की. मोदी ने आध्यात्मिक गुरु जग्गी वासुदेव से भी बातचीत की.

swachhata-hi-seva-logo अमिताभ ने पीएम मोदी को इस अभियान का श्रेय देते हुए कहा कि यदि मेरी शक्ल और अक्ल से सरकार प्रचार करा रही है तो इतना ही काफी नहीं है. मुझे लगता था कि इसके लिए निजी तौर पर भी प्रयास किया जाना चाहिए. अमिताभ ने कहा, इसलिए हमने खुद अपने स्तर पर भी काम किया. मुंबई के वर्सोवा बीच पर मैंने कुछ करने का प्रयास किया. यह एक व्यक्ति की भावना थी कि उसने सोचा कि मुझे साफ करना है और वह आगे बढ़ा तो फिर लोग आगे आए. मुझसे लोगों ने कहा कि यहां सफाई के लिए जमीन खोदने वाली मशीन नहीं है, फिर मैंने यह मशीन खरीदकर दी. यही नहीं लोगों ने कहा कि ट्रैक्टर की जरूरत है, जिससे कूड़ा उठाया जा सकता है.

पीएम मोदी ने अमिताभ का धन्यवाद देते हुए कहा, आपने दो वर्ष पहले हरिवंश राय बच्चन के जन्मदिन को स्वच्छता से जोड़ा था. आपने महान व्यक्ति की महान पंक्तियों से देश को जोड़ने के लिए मैं आपका आभार व्यक्त करता हूं.


रतन टाटा ने कहा कि हम आगे भी स्वच्छ भारत मिशन के साथ बने रहेंगे और चाहेंगे कि तकनीक के जरिए भी इसमें कुछ योगदान दिया जाए. पीएम मोदी ने स्वच्छता को लेकर टाटा समूह के योगदान की सराहना की. पीएम मोदी ने असम के डिब्रूगढ़ और गुजरात के मेहसाणा में सक्रिय स्वच्छाग्रहियों से भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बातचीत की.

पीएम मोदी ने कहा, स्वच्छता का कवरेज जो कभी 40 पर्सेंट था, अब स्वच्छता का कवरेज 90 पर्सेंट तक है. किसने सोचा होगा कि 4 साल में हम स्वच्छता के मामले में इतनी प्रगति कर लेंगे, जितनी पिछले 60 से 70 सालों में न हो पाई. किसी ने न सोचा था कि 4 वर्ष में 8 करोड़ शौचालय बनेंगे. किसी ने शायद यह सोचा भी नहीं होगा कि 4.5 लाख गांव, 450 जिले एवं 20 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश खुले में शौच से मुक्त हो सकते हैं.


पीएम मोदी ने कहा, यह सब आप सभी भारतवासियों और स्वच्छाग्रहियों के प्रयास का परिणाम है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक 3 लाख लोगों की जिंदगी स्वच्छता के चलते बचाई जा सकेगी. लेकिन, सिर्फ शौचलय बनाने भर से भारत स्वच्छ हो जाएगा तो ऐसा नहीं है. स्वच्छता एक आदत है, जिसे नित्य के अनुभवों में शामिल करना पड़ता है.



Report By Udaipur Kiran

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