अमेरिका में गणेश चतुर्थी की धूम, अमेरिकी भी हुए शरीक

लॉस एंजेल्स, 14 सितम्बर (उदयपुर किरण). अमेरिका के विभिन्न हिन्दू मंदिरों में कार्य दिवस के बावजूद गणेश चतुर्थी पर्व उल्लास के साथ मनाया गया. इस दिन बड़े शहरों में मंदिर परिसरों में पंडाल लगाए गए, पांच धातु से बने गणेश की प्रतिमा की पूजा-अर्चना की गई और फिर उन्हें एक खूबसूरत पंडाल में फूलों की सेज पर विराजमान किया गया.

इसके बाद यज्ञ हवन किया गया और मौजूद लोगों ने अपनी-अपनी ओर से आहूति दी. इस अवसर पर सामूहिक ‘महाप्रसाद’ में गणपति के प्रिय मोदक का उपस्थित भारतीय समुदाय ने चाव से सेवन किया. गणपति के जन्म दिवस के रूप में मनाए गए इस पर्व पर अमेरिकी समुदाय के लोगों की लॉर्ड गणेश के प्रति जानकारी लेने में रुचि देखी गई.

लॉस एंजेल्स, ह्युस्टन, शिकागो और न्यूयॉर्क के गणेश मंदिरों में मराठी मंडल के लोगों के साथ भारतवंशियों में पारंपरिक वेशभूषा में ‘गणपति बापा मोरिया, अब की बरस तू जल्दी आ’ के उद्घोष के साथ प्रथम पूज्य गणेश का पंचामृत से पूजा-अर्चना की और फिर गंगाजल के पानी के साथ उन्हें वेद मंत्रों के साथ स्नान कराया गया. न्यूयॉर्क के क्वींस स्थित विशाल गणेश मंदिर में सुबह से ही पंडाल और महाप्रसाद की तैयारियां शुरू हो गई थीं. इस मंदिर में अगले 11 दिनों तक गणपति की आराधना की जाएगी और प्रसाद वितरित किए जाने की योजना बताई जा रही है.

लॉस एंजेल्स के पैसाडेना हिन्दू मंदिर में गुजरात के मूल निवासी पंडित जगदीश राजगौर ने पांच धातु से बनी गणेश प्रतिमा का पंचामृत से अभिषेक किया गया. फिर भारत से लाए पवित्र गंगा जल में पानी मिला कर प्रतिमा को स्नान, कुमकुम, चंदन, इतर, पुष्प, धूप और वस्त्र आदि से सजाया गया. इस वैदिक क्रिया के साथ-साथ पार्श्व में ”ओम् गंग गंग गणपति मोरिया का संगीत बजाया जा रहा था. छोटे शहरों में लोग घरों में मिट्टी और ऑर्गेनिक रंगों से सजाई गई गणेश की मूर्ति की पूजा करते हैं और फिर श्रद्धा के अनुसार इन मूर्तियों को डेढ़ दिन, पांच दिन और ग्यारह दिन बाद घर के बाहर पानी के टब में विसर्जित कर देते हैं.

पंडित जगदीश ने बताया कि अमेरिकी नियमों के अनुसार गणपति का विसर्जन समीप की नदियों में नहीं किया जा सकता. इसके लिए हजार डॉलर किराए की बैटरी चालित नाव किराए पर लेनी पड़ती है और फिर बीच नदी में प्रवाहित करनी जरूरी होती है. व्यक्तिगत तौर पर अथवा छोटे-छोटे मंदिरों के लिए इतनी बड़ी राशि जुटाना संभव नहीं है.

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