फिल्मों के वे गीत जिन्होंने हिन्दी भाषा का परचम लहराया

नई दिल्ली, 14 सितम्बर (उदयपुर किरण). हिन्दी के विकास और विस्तार में हिन्दी फिल्म उद्योग का अहम योगदान रहा है. शब्दों को सहज और सरल बनाने के लिए फिल्म उद्योग ने भी कई प्रयोग किए जो आम बोलचाल में धड़ल्ले से इस्तेमाल होते हैं. हिन्दी सिनेमा लगातार 100 सालों से हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार का सशक्त माध्यम बना हुआ है.

हिन्दी फिल्मों में गीत लिखने वाले गीतकार गोपालदास नीरज, संतोष आनंद, आनंद बख्शी, राजेन्द्र कृष्ण, शैलेन्द्र, साहिर लुधियानवी, राजा मेंहदी अली खां से लेकर गुलजार, जावेद अख़्तर, शकील बदायुनी, कमर जलालाबादी और अब इरशाद कामिल, अमिताभ भट्टाचार्य, मनोज मुंतसिर, स्वानंद किरकिरे तक एक लंबी है शृंखला है गीतकारों-एवं शायरों की, जिनके लिखे गीत लोगों की जुबान पर आज भी चढ़े हुए हैं.
ऐसे ही कुछ गीतों के बोल हैं-

फिल्म- कन्यादान (1968)

लिखे जो खत तुझे, वो तेरी याद में
हजारों रंग के नजारे बन गये
सबेरा जब हुआ तो फूल बन गए
जो रात आई तो सितारे बन गए
गीतकार-नीरज
गायक- मोहम्मद रफ़ी

फिल्म-सूरज (1966)

बहारों फूल बरसाओ
मेरा महबूब आया है –
हवाओं रागिनी गाओ
मेरा महबूब आया है

फिल्म-सूरज (1966)

गीतकार-हसरत जयपुरी
गायक- मोहम्मद रफ़ी

फिल्म- मासूम (1983)

हुज़ूर इस कदर भी न इतरा के चलिये
खुले आम आंचल न लहरा के चलिये
गीतकार-गुलज़ार

फिल्म- आंधी (1975)

इक दूर से आती है, पास आके पलटती है
इक राह अकेली सी, रुकती है न चलती है
गीतकार- गुलज़ार
गायक-किशोर कुमार एवं लता मंगेशकर

फिल्म- थोड़ी सी बेवफ़ाई (1978)

हज़ार राहें, मुड़के देखीं, कहीं से कोई सदा न आई
बड़ी वफ़ा से, निभाई तुमने, हमारी थोड़ी-सी बेवफ़ाई

फिल्म- थोड़ी सी बेवफ़ाई (1978)

गीतकार-गुलज़ार
गायक- किशोर कुमार एवं लता मंगेशकर

फिल्म- बार्डर (1998)

हैं लिपटे धुंध में दिलकश नजारे, नदी ख़ामोश है, चुप हैं किनारे
एक छोटी-सी कश्ती है और हम हैं, चले जाते हैं लहरों के सहारे
गीतकार- जावेद अख़्तर

फिल्म-सागर (1975)

चेहरा है या चांद खिला है, ज़ुल्फ घनेरी शाम है क्या
सागर जैसी आंखों वाली, ये तो बता तेरा नाम है क्या

फिल्म-सागर (1975)

गीतकार-जावेद अख़्तर
गायक- किशोर कुमार
फिल्म- उमरांव जान
आंखों में हैं नशीले भंवर, जुल्फ में लहर
दरिया ये कैसा हुस्न का दिखला दिया हमें
गीतकार-जावेद अख़्तर
गायिका-अल्का याज्ञनिक

फिल्म- बार्डर (1998)

उनके चेहरे की ये नर्मियां, उनके ज़ुल्फों की ये बदलियां
उनका आंखों के रोशन दिये, उनके होंठों की ये सुर्खियां
गीतकार-जावेद अख़्तर
गायक- रूप कुमार राठौड़

फिल्म- जब वी मेट (2007)

नैना तेरे कजरारे हैं, नैनों पे हम दिल हारे हैं
अनजाने ही तेरे नैनों ने, वादे किए कई सारे हैं
गीतकार-इरशाद कामिल
गायक-राशिद खान

फिल्म- अजब प्रेम की ग़ज़ब कहानी (2009)

कैसे बताएं क्यों तुझको चाहें, यारा बता न पाये
बाते दिलों की देखो जो बाकी आंखें तुझको समझायें
गीतकार-इरशाद कामिल
गायक-आतिफ असलम

फिल्म- परिणीता (2005)

एक नदी से मैंने पूछा इठला के चल दी कहां
दूर तेरे पिया का घर है, बलखा के चल दी कहां
थोड़ा वो घबराई थोड़ा वो शरमाई, उछली यहां से वहां
सागर से मिलने का उसका तो सपना था, मेरी ही तरह पिया
गीतकार-स्वानंद किरकिरे
गायक- सोनू निगम एवं श्रेया घोषाल
फिल्म- प्यार का बंधन (1963)
भूख ने हमको जनम दिया, मेहनत ने हमको पाला
हम लोगों का इस दुनिया में कोई नहीं रखवाला
गीतकार-साहिर लुधिय़ानवी
फिल्म- फिर सुबह होगी (1958)
खोली भी छिन गई हैं, बेंचे भी छिन गई हैं
सड़कों पे घूमता है, अब कारवां हमारा…
जितनी भी बिल्डिंगे थीं, सेठों ने बांट ली हैं
फुटपाथ बंबई के हैं आशियां हमारा
गीतकार- साहिर लुधियानवी
फिल्म-चोरी-चोरी (1956)
आजा सनम, मधुर चांदनी में हम तुम मिले तो वीराने में भी आ जाएगी बहार
झुमने लगेगा आसमान, झुमने लगेगा आसमान
गीतकार-हसरत जयपुरी
गायक- मन्ना डे एवं लता मंगेशकर
फिल्म- अलग-अलग (1985)
कहीं थी ये बदनसीबी, कहीं थी मेरी ग़रीबी;
किस किस का नाम लूं मैं, मुझे हर किसी ने मारा.
गीतकार-आनंद बख्शी

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